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अभिजीत दिपके का निर्वासन: क्या अमेरिका ने भारत को दी थी जानकारी? विरोध प्रदर्शन से पहले सरकार से पूछे गए सवाल

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 02:01 pm
अभिजीत दिपके का निर्वासन: क्या अमेरिका ने भारत को दी थी जानकारी? विरोध प्रदर्शन से पहले सरकार से पूछे गए सवाल

अभिजीत दिपके के अमेरिका से निर्वासन को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठ रहे हैं। यह विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन से ठीक पहले गरमाया है।

भारत सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि क्या अमेरिकी अधिकारियों ने सक्रिय कार्यकर्ता अभिजीत दिपके के निर्वासन (deportation) के संबंध में नई दिल्ली को पहले से सूचित किया था। यह मामला उस समय सामने आया है जब राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा एक बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। दिपके की भारत वापसी को लेकर राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार से यह पूछा गया है कि क्या इस निर्वासन प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल का पालन किया गया और क्या भारतीय विदेश मंत्रालय को इस कदम की आधिकारिक जानकारी दी गई थी। यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि दिपके की वापसी का समय दिल्ली में होने वाली राजनीतिक रैली के साथ मेल खाता है। जंतर-मंतर पर आयोजित होने वाली यह रैली सीजेपी (CJP) के बैनर तले हो रही है, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के जुटने की उम्मीद है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि दिपके के खिलाफ की गई कार्रवाई और उनके अचानक भारत लौटने के पीछे की परिस्थितियों को स्पष्ट किया जाना चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर रुचि का विषय बनी हुई है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय प्रवास और निर्वासन से जुड़े नियम अक्सर प्रवासी भारतीयों (NRIs) के अधिकारों को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दो देशों के बीच निर्वासन की प्रक्रिया में आमतौर पर विस्तृत कानूनी संवाद शामिल होता है। यदि अमेरिका ने इस मामले में भारत को जानकारी नहीं दी थी, तो यह द्विपक्षीय सुरक्षा समझौतों पर सवाल खड़े कर सकता है। वहीं, सरकारी सूत्रों ने अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। जैसे-जैसे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए भीड़ जमा हो रही है, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार की विदेश नीति और नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल पूछ रहे हैं। आने वाले घंटों में विदेश मंत्रालय या गृह मंत्रालय की ओर से स्पष्टीकरण आने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ हो सकेगी।
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