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विश्व पर्यावरण दिवस: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा ने 'मिशन लाइफ' के तहत आयोजित किया योग सत्र

ICN24 Admin 5 जून 2026, 09:02 am
विश्व पर्यावरण दिवस: नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा ने 'मिशन लाइफ' के तहत आयोजित किया योग सत्र

लेह स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा ने विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में 'मिशन लाइफ' पहल के तहत एक विशेष योग सत्र का आयोजन किया, जिसमें पर्यावरण और स्वास्थ्य के अंतर्संबंधों पर जोर दिया गया।

लेह स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा (NISR) ने विश्व पर्यावरण दिवस के आगामी आयोजन के उपलक्ष्य में 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE - Lifestyle for Environment) के तहत एक व्यापक योग सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय पद्धतियों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के बीच सामंजस्य स्थापित करना था। संस्थान के परिसर में आयोजित इस सत्र में संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं और छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मिशन लाइफ, जो कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई एक वैश्विक जन आंदोलन की पहल है, व्यक्तियों को स्थायी जीवन शैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा ने इस दृष्टिकोण को अपनाते हुए योग को एक ऐसे साधन के रूप में प्रस्तुत किया जो न केवल शारीरिक शुद्धि करता है, बल्कि मनुष्य को प्रकृति के प्रति अधिक संवेदनशील और जागरूक भी बनाता है। सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि किस प्रकार सोवा रिग्पा की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति और योग दोनों ही प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर रहने की वकालत करते हैं। योग सत्र का नेतृत्व अनुभवी योग प्रशिक्षकों द्वारा किया गया, जिन्होंने विभिन्न आसनों और प्राणायाम का अभ्यास कराया। इन अभ्यासों को विशेष रूप से इस तरह से डिजाइन किया गया था कि वे मानसिक शांति और शारीरिक स्फूर्ति प्रदान करने के साथ-साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी जगा सकें। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि 'मिशन लाइफ' केवल एक नारा नहीं है, बल्कि यह समय की मांग है कि हम अपनी दैनिक आदतों में बदलाव लाएं ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सके। कार्यक्रम के दौरान प्लास्टिक मुक्त परिसर और ऊर्जा संरक्षण की शपथ भी ली गई। संस्थान ने इस बात पर जोर दिया कि सोवा रिग्पा जैसी प्राचीन चिकित्सा प्रणालियां हमेशा से 'स्वस्थ तन में स्वस्थ मन' और 'स्वस्थ पृथ्वी' के सिद्धांत पर आधारित रही हैं। इस अवसर पर यह भी बताया गया कि किस प्रकार जलवायु परिवर्तन का सीधा प्रभाव मानव स्वास्थ्य और औषधीय पौधों की उपलब्धता पर पड़ रहा है। अंत में, संस्थान ने आने वाले दिनों में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित और भी कई जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस आयोजन ने न केवल योग के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का मौलिक कर्तव्य है। उपस्थित लोगों ने इस पहल की सराहना की और अपने जीवन में सतत विकल्पों को चुनने का संकल्प लिया।
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