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विश्व कप से ठीक पहले ईरान का अमेरिका पर आरोप: टीम स्टाफ के वीजा में देरी को बताया जानबूझकर की गई बाधा
ICN24 Newsroom 8 जून 2026, 08:00 am

ईरान ने अमेरिका पर विश्व कप से पहले अपनी टीम के अधिकारियों और सहयोगी स्टाफ के वीजा रोकने का आरोप लगाया है, जिससे उनकी तैयारियों में बाधा आई है।
विश्व कप फुटबॉल के शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष रह गए हैं, लेकिन खेल के मैदान से बाहर कूटनीतिक तनाव चरम पर है। ईरान ने आधिकारिक तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह उनके राष्ट्रीय टीम के कई अधिकारियों और सहयोगी स्टाफ (सपोर्ट स्टाफ) को वीजा देने में जानबूझकर देरी कर रहा है। ईरानी फुटबॉल महासंघ के अनुसार, इस प्रशासनिक बाधा के कारण टीम की अंतिम चरण की तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।
ईरान का कहना है कि मेजबान देश को सभी प्रतिभागी देशों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए, लेकिन इस मामले में अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी की जा रही है। टीम के कई महत्वपूर्ण सदस्यों, जिनमें तकनीकी विश्लेषक और चिकित्सा कर्मचारी शामिल हैं, को अभी तक यात्रा की अनुमति नहीं मिली है। ईरान ने इसे एक 'राजनीतिक चाल' करार दिया है जिसका उद्देश्य खेल के मैदान पर उनके प्रदर्शन को प्रभावित करना है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय और दक्षिण एशियाई समुदायों के लिए यह खबर काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में खेल प्रेमी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि राजनीतिक विवादों का असर खेल भावना पर पड़ रहा है। भारतीय समुदाय, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वीजा संबंधी जटिलताओं का सामना करता है, इस स्थिति को प्रवासी और खेल कूटनीति के नजरिए से देख रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की देरी से न केवल टीम का मनोबल गिरता है, बल्कि यह खेल के निष्पक्ष आयोजन पर भी सवाल खड़े करता है।
ईरान ने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल संस्थाओं से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका तर्क है कि मेजबान राष्ट्र को खेल और राजनीति को अलग रखना चाहिए। दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने इन आरोपों पर सीधे तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उन्होंने प्रक्रियात्मक सुरक्षा जांच को इसका कारण बताया है। हालांकि, ईरान ने इस स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए इसे एक सोची-समझी रणनीति बताया है।
जैसे-जैसे मैच का दिन नजदीक आ रहा है, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह गतिरोध समय रहते सुलझ पाता है। खेल जगत की निगाहें अब फीफा पर टिकी हैं कि वह इस संकट को हल करने के लिए क्या कदम उठाता है। फिलहाल, ईरानी टीम बिना अपने पूर्ण सहयोगी दल के अभ्यास करने को मजबूर है, जिससे टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में उनके प्रदर्शन पर असर पड़ने की संभावना है।
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