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वुमेंस रिफ्यूजी कमीशन ने डॉ. ज़ांथे शार्क को अपना नया अध्यक्ष और सीईओ नियुक्त किया
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 12:31 pm

मानवीय सहायता और महिला अधिकारों की पैरोकार डॉ. ज़ांथे शार्क अब वुमेंस रिफ्यूजी कमीशन (WRC) का नेतृत्व करेंगी, जो शरणार्थी महिलाओं के लिए वैश्विक स्तर पर कार्य करता है।
वुमेंस रिफ्यूजी कमीशन (WRC) ने डॉ. ज़ांथे शार्क को अपना नया अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की घोषणा की है। डॉ. शार्क एक अनुभवी मानवीय नेता, न्यूज़़रूम संस्थापक और महिला अधिकारों की मुखर समर्थक रही हैं। उनका चयन संगठन के उस मिशन को आगे बढ़ाने के लिए किया गया है जो विस्थापित महिलाओं, बच्चों और युवाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
डॉ. शार्क का करियर दशकों तक मानवीय संकटों और सामाजिक न्याय की दिशा में काम करने का रहा है। उन्होंने 'द फुलर प्रोजेक्ट' की स्थापना की, जो एक वैश्विक समाचार कक्ष है और दुनिया भर की महिलाओं से जुड़ी अनकही कहानियों को सामने लाने का काम करता है। WRC में उनकी भूमिका ऐसे समय में आई है जब दुनिया भर में शरणार्थियों का संकट गहराता जा रहा है और मानवीय सहायता की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह नियुक्ति विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण एशियाई मूल के कई लोग शरणार्थी पृष्ठभूमि से आते हैं या संकटग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की मदद के लिए सक्रिय रहते हैं। ऑस्ट्रेलिया की बहुसांस्कृतिक नीतियों के तहत, प्रवासी और शरणार्थी महिलाओं की सुरक्षा और उनके सशक्तिकरण के मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं। डॉ. शार्क के नेतृत्व में WRC की नीतियां ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी शरणार्थी नीतियों को प्रभावित कर सकती हैं, जहाँ भारतीय समुदाय की महिलाएं और युवा स्वयंसेवी संस्थाओं के माध्यम से विस्थापितों की मदद में जुटे हैं।
WRC बोर्ड की ओर से जारी बयान में कहा गया कि डॉ. शार्क की दूरदर्शिता और संसाधन जुटाने की उनकी क्षमता संगठन को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी। उन्होंने शिक्षा और विकास के क्षेत्र में भी व्यापक शोध कार्य किया है, विशेष रूप से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों के लिए। उनके पास उन जटिल चुनौतियों का गहरा अनुभव है जिनका सामना विस्थापित महिलाएं अपनी सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक स्वतंत्रता के मामले में करती हैं।
अपनी नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. शार्क ने कहा कि वह ऐसे समय में इस वैश्विक संगठन का नेतृत्व करने के लिए उत्साहित हैं जब विस्थापित समुदायों की आवाज़ को वैश्विक मंचों पर सुना जाना बेहद जरूरी है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मानवीय सहायता केवल राहत कार्य तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें महिलाओं के नेतृत्व और उनकी एजेंसी को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। ऑस्ट्रेलिया के भारतीय और प्रवासी समुदायों के लिए, जो अक्सर वैश्विक मानवीय मुद्दों पर सक्रिय रहते हैं, यह बदलाव आने वाले समय में नीतिगत सुधारों और वैश्विक सहयोग के नए द्वार खोल सकता है।
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