राजनीति
‘हिंदुत्व से जुड़ रहीं बेटियां ही निशाने पर क्यों?’: कंगना रनौत ने धर्म परिवर्तन और समानता पर उठाए सवाल
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 12:37 am

भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने फिल्म जगत में धर्म परिवर्तन और हिंदू बेटियों की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए एक बार फिर वैचारिक बहस छेड़ दी है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत एक बार फिर अपने बेबाक बयानों को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। मंडी से सांसद कंगना ने हाल ही में एक वीडियो संदेश जारी कर हिंदू महिलाओं के अधिकारों, धर्म परिवर्तन और वैचारिक भेदभाव पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन महिलाओं का पक्ष लिया है जो हिंदुत्व की विचारधारा से जुड़ी हैं और जिन्हें उनके विचारों के कारण निशाना बनाया जा रहा है।
संसद सत्र में शामिल होने के लिए निकलते समय साझा किए गए इस वीडियो में कंगना ने कहा कि वह संसद के लिए देर हो रही हैं, लेकिन यह मुद्दा उठाना उनके लिए अनिवार्य था। उन्होंने पूछा, "आखिर हिंदुत्व से जुड़ रही बेटियां ही निशाने पर क्यों हैं?" अभिनेत्री ने फिल्म उद्योग में विवाह के लिए धर्म परिवर्तन की प्रथा पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने तर्क दिया कि जब कलाकार विवाह करते हैं, तो अक्सर हिंदू बेटियों को ही अपना धर्म बदलने के लिए मजबूर या प्रेरित किया जाता है, जो समानता के सिद्धांतों के विरुद्ध है।
कंगना रनौत का यह बयान उनके उस हालिया विवाद के ठीक बाद आया है जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं और 'जेन-जी' (Gen Z) पीढ़ी के एक वर्ग की आलोचना की थी। उस समय उन्होंने प्रदर्शनकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए तीखी टिप्पणी की थी। अब अपने नए बयान में उन्होंने हिंदू बेटियों के लिए 'समानता' की मांग करते हुए कहा है कि समाज में एक ऐसा परिवेश होना चाहिए जहां उन्हें अपनी पहचान और धर्म को बनाए रखने का पूरा अधिकार हो।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी यह विषय काफी प्रासंगिक है। वहां का प्रवासी समाज अक्सर भारतीय राजनीति और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी चर्चाओं में गहरी रुचि रखता है। कंगना रनौत जैसे प्रभावक जब सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान के मुद्दों को उठाते हैं, तो इसका असर वैश्विक स्तर पर भारतीय डायस्पोरा की सोच और विमर्श पर भी पड़ता है। विशेष रूप से अंतर-धार्मिक विवाह और सांस्कृतिक संरक्षण के मुद्दे मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय परिवारों के बीच अक्सर चर्चा का विषय बने रहते हैं।
कंगना रनौत के इन बयानों पर राजनीतिक गलियारों में भी प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। जहां उनके समर्थक इसे हिंदू हितों की मुखर रक्षा मान रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि एक सांसद के रूप में उन्हें अधिक समावेशी भाषा का प्रयोग करना चाहिए। फिलहाल, कंगना ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी विचारधारा और हिंदू समाज के हितों से जुड़े मुद्दों पर पीछे हटने वाली नहीं हैं।
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