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कौन हैं अबेलाडों डी ला एस्प्रिएला? कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप समर्थित 'आउटसाइडर' की जीत
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 05:27 pm
कोलंबिया के राष्ट्रपति चुनाव में एक बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। डोनाल्ड ट्रंप समर्थित अबेलाडों डी ला एस्प्रिएला ने बेहद कड़े मुकाबले के बाद जीत दर्ज की है।
कोलंबिया के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। देश के हालिया राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों ने न केवल दक्षिण अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के राजनीतिक विश्लेषकों को चौंका दिया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा समर्थित और खुद को व्यवस्था विरोधी (आउटसाइडर) बताने वाले अबेलाडों डी ला एस्प्रिएला ने कोलंबिया के राष्ट्रपति पद का चुनाव जीत लिया है। एक बेहद कड़े और तनावपूर्ण 'रन-ऑफ' वोट में एस्प्रिएला ने मामूली अंतर से जीत हासिल की, जो देश में बढ़ते लोकलुभावनवाद (populism) की लहर को दर्शाता है।
अबेलाडों डी ला एस्प्रिएला पेशे से एक हाई-प्रोफाइल वकील रहे हैं और उन्हें उनकी आक्रामक शैली और विलासी जीवनशैली के लिए जाना जाता है। राजनीति में आने से पहले ही वे कोलंबिया के सार्वजनिक जीवन में एक चर्चित चेहरा थे। उन्होंने अपना चुनाव अभियान भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े रुख और अर्थव्यवस्था को उदार बनाने के वादे पर केंद्रित किया था। उनके समर्थकों का मानना है कि वे कोलंबिया की पारंपरिक राजनीतिक व्यवस्था को जड़ से उखाड़ फेंकने में सक्षम हैं, जबकि आलोचक उन्हें एक विभाजनकारी नेता के रूप में देखते हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन एस्प्रिएला के लिए गेम-चेंजर साबित हुआ। ट्रंप ने उन्हें 'कोलंबिया का रक्षक' बताते हुए उनके व्यापार-अनुकूल एजेंडे की सराहना की थी। एस्प्रिएला की जीत को वैश्विक स्तर पर दक्षिणपंथी आंदोलनों की वापसी के रूप में देखा जा रहा है। उनके आर्थिक एजेंडे में करों में भारी कटौती, सरकारी खर्च में कमी और खनन एवं ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देना शामिल है। कोलंबिया की अर्थव्यवस्था, जो वर्तमान में मुद्रास्फीति और बेरोजगारी की चुनौतियों से जूझ रही है, अब एस्प्रिएला के 'शॉक थेरेपी' सुधारों की ओर देख रही है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए कोलंबिया के ये घटनाक्रम महत्वपूर्ण हैं। वैश्विक निवेशक और कमोडिटी बाजार कोलंबिया में होने वाले बदलावों पर करीब से नजर रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया और कोलंबिया दोनों ही संसाधन-समृद्ध देश हैं, और एस्प्रिएला की नीतियां वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा, अमेरिका के साथ कोलंबिया के मजबूत होते रिश्तों का असर हिंद-प्रशांत क्षेत्र के भू-राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है, जिससे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यापारिक हितों पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ने की संभावना है।
आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि एस्प्रिएला अपने चुनावी वादों को किस तरह लागू करते हैं। एक खंडित जनादेश के साथ, उनके लिए संसद में कानून पारित कराना एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, उनकी जीत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि कोलंबिया की जनता पारंपरिक राजनीति से ऊब चुकी है और एक नई दिशा की तलाश में है। वैश्विक मंच पर एस्प्रिएला का उदय अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक नया मोड़ लेकर आया है।
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