राजनीति
पश्चिम बंगाल: टीएमसी के कई मेयरों का इस्तीफा, भाजपा पर लगाया नगर निकायों को ठप करने का आरोप
ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 03:00 pm

पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजों के बाद चार टीएमसी मेयरों ने इस्तीफा दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा पर नगर निकायों के कामकाज में बाधा डालने का गंभीर आरोप लगाया है।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। 4 मई के चुनावी नतीजों के बाद से राज्य के विभिन्न नगर निगमों के चार प्रमुख मेयरों और कई पार्षदों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इस सामूहिक इस्तीफे के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को जिम्मेदार ठहराया है। टीएमसी का आरोप है कि भाजपा के हस्तक्षेप और दबाव के कारण राज्य में नगर निकायों का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन इस्तीफों के कारण कई शहरों में प्रशासनिक सेवाएं बाधित हुई हैं। टीएमसी नेतृत्व का कहना है कि भाजपा लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई स्थानीय सरकारों को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। इस्तीफे देने वाले मेयरों का दावा है कि उन्हें विकास कार्यों को आगे बढ़ाने में निरंतर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था, जिससे उनके लिए पद पर बने रहना मुश्किल हो गया था।
दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा नेतृत्व का कहना है कि यह टीएमसी की अपनी आंतरिक कलह और जनता के प्रति जवाबदेही से बचने का एक तरीका है। भाजपा के अनुसार, टीएमसी के शासन में भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के कारण नगर निकाय पहले से ही संघर्ष कर रहे थे और अब अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए विपक्ष पर दोष मढ़ा जा रहा है।
इस राजनीतिक घटनाक्रम का असर पश्चिम बंगाल के प्रवासी समुदाय पर भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के लिए यह चिंता का विषय है। सिडनी और मेलबर्न में बसे कई प्रवासियों के परिवार आज भी बंगाल के इन प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं। स्थानीय निकाय सेवाओं में व्यवधान का सीधा असर उनके परिवारों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो राज्य के कई हिस्सों में नागरिक सुविधाओं जैसे पानी की आपूर्ति, कचरा प्रबंधन और सड़क मरम्मत के कार्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। फिलहाल, राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच इस मुद्दे पर संवाद की स्थिति भी स्पष्ट नहीं है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है। टीएमसी अब इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने और भाजपा के 'अलोकतांत्रिक' व्यवहार को उजागर करने की योजना बना रही है।
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