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वीजा और मास्टरकार्ड के $38 बिलियन के ऐतिहासिक समझौते को मिली मंजूरी: व्यापारियों और ग्राहकों पर क्या होगा असर?
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 02:00 am
20 साल की कानूनी लड़ाई के बाद वीजा और मास्टरकार्ड के $38 बिलियन के सेटलमेंट को मंजूरी मिली है, जिससे व्यापारियों के लिए स्वाइप फीस कम होने की उम्मीद है।
एक ऐतिहासिक घटनाक्रम में, अमेरिकी जिला अदालत ने वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) द्वारा प्रस्तावित 38 बिलियन डॉलर के एक बड़े समझौते को प्रारंभिक मंजूरी दे दी है। यह समझौता पिछले 20 वर्षों से चल रही कानूनी लड़ाई का परिणाम है, जिसमें व्यापारियों ने इन दिग्गज भुगतान कंपनियों पर 'स्वाइप फीस' (Swipe Fees) के नाम पर अत्यधिक शुल्क वसूलने का आरोप लगाया था। इस फैसले का वैश्विक वित्तीय बाजार पर व्यापक असर पड़ने की संभावना है, जिससे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यापारिक समुदाय भी प्रभावित हो सकता है।
स्वाइप फीस या इंटरचेंज फीस वह शुल्क है जो व्यापारी हर बार ग्राहक द्वारा क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने पर बैंकों को देते हैं। अब तक, वीजा और मास्टरकार्ड के पास इन शुल्कों को निर्धारित करने और व्यापारियों पर सख्त नियम लागू करने की शक्तियां थीं। इस नए समझौते के तहत, दोनों कंपनियां अगले पांच वर्षों के लिए अपनी स्वाइप फीस की दरों को कम करने और उन्हें स्थिर करने पर सहमत हुई हैं। अनुमान है कि इससे अमेरिकी व्यापारियों को अरबों डॉलर की बचत होगी, और विशेषज्ञों का मानना है कि इस मिसाल का पालन ऑस्ट्रेलिया और अन्य बाजारों में भी किया जा सकता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के छोटे और मध्यम स्तर के व्यवसायियों (SMEs) के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, ऑस्ट्रेलिया के व्यापारी भी उच्च लागत वाली डिजिटल ट्रांजेक्शन फीस से जूझ रहे हैं। यद्यपि यह समझौता सीधे तौर पर अमेरिका से संबंधित है, लेकिन यह वैश्विक स्तर पर वित्तीय पारदर्शिता और शुल्क कटौती के लिए एक नया मानक स्थापित करता है। कई भारतीय रेस्तरां मालिक और रिटेलर्स ऑस्ट्रेलिया में अपनी लागत कम करने के लिए समान सुधारों की मांग कर रहे हैं।
ग्राहकों के लिए इस फैसले का मिला-जुला असर हो सकता है। जहां एक ओर व्यापारियों के लिए कम लागत का मतलब उपभोक्ताओं के लिए कम कीमतें हो सकती हैं, वहीं दूसरी ओर इसका प्रभाव क्रेडिट कार्ड रिवार्ड्स और कैशबैक कार्यक्रमों पर भी पड़ सकता है। बैंक अपनी आय की भरपाई के लिए रिवार्ड पॉइंट्स में कटौती कर सकते हैं। इसके अलावा, समझौते का एक हिस्सा व्यापारियों को ग्राहकों को उनके कार्ड के उपयोग के आधार पर अलग-अलग शुल्क लगाने की अनुमति भी देता है, जो उपभोक्ता व्यवहार को बदल सकता है।
कानूनी जानकारों का कहना है कि यह केवल एक प्रारंभिक मंजूरी है और अंतिम सुनवाई अभी बाकी है। यदि यह पूर्ण रूप से लागू हो जाता है, तो यह आधुनिक भुगतान प्रणाली के इतिहास में सबसे बड़े अविश्वास (Antitrust) समझौतों में से एक होगा। भारतीय समुदाय के जो लोग अंतरराष्ट्रीय व्यापार या डिजिटल भुगतान सेवाओं से जुड़े हैं, उनके लिए यह नीतिगत बदलाव भविष्य की व्यापारिक रणनीतियों को प्रभावित करने वाला साबित होगा।
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