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ज्योतिर्मय संस्कार शिविर: ब्यावर में परीक्षा के साथ संपन्न, 200 से अधिक बच्चों ने दिखाई अपनी सांस्कृतिक समझ
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 12:25 am

ब्यावर में श्री अखिल भारतवर्षिय साधुमार्गी जैन संघ द्वारा आयोजित ज्योतिर्मय संस्कार शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ, जिसमें 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया।
राजस्थान के ब्यावर शहर में संस्कृति और संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के उद्देश्य से आयोजित 'ज्योतिर्मय संस्कार शिविर' का भव्य समापन हुआ। श्री अखिल भारतवर्षिय साधुमार्गी जैन संघ के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर के अंतिम चरण में विद्यार्थियों की परीक्षा ली गई, जिसमें बच्चों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी दर्ज कराई। बिरद भवन (जवाहर भवन) में आयोजित इस परीक्षा में लगभग 200 से अधिक शिविरार्थियों ने हिस्सा लिया, जो इस आयोजन की सफलता का प्रमाण है।
शिविर के समापन के अवसर पर संघ के महामंत्री धर्मी चंद औस्तवाल ने संबोधित करते हुए कहा कि आज के आधुनिक युग में जहाँ तकनीक और पाश्चात्य संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, वहीं बच्चों को अपने मूल संस्कारों से जोड़ना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा का मुख्य उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान की जाँच करना नहीं था, बल्कि बच्चों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान जगाना था। औस्तवाल ने इस बात पर जोर दिया कि संस्कारित बच्चे ही एक सभ्य और सशक्त समाज की नींव रखते हैं।
इस विशेष शिविर के दौरान बच्चों को जैन दर्शन के सिद्धांतों के साथ-साथ दैनिक जीवन में अपनाए जाने वाले सदाचार के नियमों से भी अवगत कराया गया। परीक्षा के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बनता था। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि शिविरार्थियों को विभिन्न समूहों में विभाजित किया गया था ताकि उनकी आयु और समझ के अनुसार उन्हें शिक्षा दी जा सके। समापन समारोह के दौरान कई अभिभावकों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और संघ के इस प्रयास की सराहना की।
ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी इस तरह के आयोजन एक प्रेरणा स्रोत हैं। प्रवासी भारतीयों के बीच अपनी जड़ों से जुड़े रहने की चुनौती हमेशा बनी रहती है। ब्यावर जैसे शहरों में होने वाले ये संस्कार शिविर यह संदेश देते हैं कि यदि बचपन से ही सही मार्गदर्शन मिले, तो युवा पीढ़ी अपनी पहचान को सुरक्षित रख सकती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में भी भारतीय समुदाय इसी तर्ज पर 'बाल विकास' और 'संस्कार केंद्रों' के माध्यम से बच्चों को अपनी भाषा और संस्कृति से जोड़ रहे हैं।
कार्यक्रम के अंत में संघ के स्वयंसेवकों और शिक्षकों का आभार व्यक्त किया गया जिन्होंने निस्वार्थ भाव से बच्चों के मार्गदर्शन में अपना योगदान दिया। आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस शिविर से सीखे गए मूल्य बच्चों के भविष्य को उज्ज्वल बनाएंगे और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित होने में मदद करेंगे। आगामी समय में संघ द्वारा ऐसे और भी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है ताकि यह सिलसिला निरंतर चलता रहे।
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