राजनीति
कामकाजी मां और बेटे की भावुक बातचीत ने सोशल मीडिया पर छेड़ी नई बहस, वर्क-लाइफ बैलेंस पर उठे सवाल
ICN24 Newsroom 10 जून 2026, 03:00 am

हैदराबाद की एक महिला और उनके नन्हे बेटे के बीच काम पर जाने को लेकर हुई बातचीत ने इंटरनेट पर कामकाजी माता-पिता के संघर्षों की एक नई चर्चा शुरू कर दी है।
आधुनिक दौर में करियर और परिवार के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। हाल ही में हैदराबाद की एक महिला और उनके छोटे बेटे के बीच हुई एक भावुक बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो ने न केवल भारत में, बल्कि ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रह रहे भारतीय प्रवासियों के बीच भी कामकाजी माता-पिता के मानसिक और भावनात्मक संघर्ष पर एक गंभीर बहस छेड़ दी है।
वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि एक नन्हा बच्चा अपनी मां को काम पर जाने से रोकने की कोशिश कर रहा है। वह अपनी मासूमियत भरी आवाज़ में मां से कहता है कि उसे ऑफिस जाने की ज़रूरत नहीं है। जब मां उसे समझाने की कोशिश करती है कि काम करना ज़रूरी है, तो बच्चे का मासूम जवाब और मां की बेबसी कई लोगों के दिलों को छू गई। यह वीडियो उन लाखों माता-पिता की कहानी बयां करता है जो रोज़ाना अपने बच्चों की परवरिश और पेशेवर ज़िम्मेदारियों के बीच तालमेल बिठाने की जद्दोजहद करते हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस वीडियो को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। जहां कुछ लोग इसे 'मदर्स गिल्ट' (मां होने का अपराधबोध) से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं अन्य लोग इसे आज की कॉर्पोरेट संस्कृति की विफलता मान रहे हैं। कई यूज़र्स का तर्क है कि कार्यस्थलों को परिवारों के प्रति अधिक लचीला होना चाहिए ताकि माता-पिता को अपने बच्चों के महत्वपूर्ण वर्षों को खोना न पड़े।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह मुद्दा विशेष रूप से प्रासंगिक है। यहाँ रह रहे कई भारतीय माता-पिता बिना किसी बड़े पारिवारिक सहयोग (extended family support) के बच्चों को संभालते हैं। ऑस्ट्रेलिया की 'वर्क-लाइफ बैलेंस' नीतियों के बावजूद, प्रवासी माता-पिता अक्सर अकेलेपन और काम के दबाव के बीच अपने बच्चों को डे-केयर में छोड़ने पर मजबूर होते हैं। इस वीडियो ने उन परिवारों के ज़ख्मों को फिर से कुरेद दिया है जो अपने घर और वतन से दूर करियर बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के वीडियो समाज में एक ज़रूरी बदलाव की ओर इशारा करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के साथ बिताया गया समय उनकी भावनात्मक वृद्धि के लिए अनिवार्य है, लेकिन साथ ही आर्थिक सुरक्षा भी उतनी ही ज़रूरी है। बहस अब इस बात पर केंद्रित हो रही है कि क्या कंपनियां और सरकारें ऐसी नीतियां बना सकती हैं जहाँ 'काम' और 'ममता' को एक-दूसरे का विरोधी न माना जाए।
यह वीडियो केवल एक निजी पल नहीं, बल्कि उस वैश्विक संकट का प्रतिबिंब है जहाँ सफलता की दौड़ में अक्सर परिवार पीछे छूट जाते हैं। फिलहाल यह वीडियो इंटरनेट पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है और लोग अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कर रहे हैं।
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