राजनीति
सर्बिया ने उज्बेकिस्तान को मध्य एशिया का प्रमुख भागीदार बताया, द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा
ICN24 Newsroom 4 अग॰ 2026, 10:37 pm
सर्बिया ने उज्बेकिस्तान के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करते हुए उसे मध्य एशिया में अपना सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी घोषित किया है।
बेलग्रेड और ताशकंद के बीच बढ़ते कूटनीतिक संबंधों के एक नए अध्याय में, सर्बिया ने उज्बेकिस्तान को मध्य एशियाई क्षेत्र में अपना प्रमुख भागीदार घोषित किया है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई उच्च स्तरीय वार्ताओं के दौरान, द्विपक्षीय सहयोग को और अधिक गहरा करने और व्यापारिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने पर सहमति बनी है। यह कदम सर्बिया की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अपने पारंपरिक यूरोपीय बाजारों से आगे निकलकर मध्य एशिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ जुड़ना चाहता है।
उज्बेकिस्तान, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, सर्बिया के लिए इस क्षेत्र में एक प्रवेश द्वार की भूमिका निभा सकता है। सर्बियाई अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच कृषि, प्रौद्योगिकी, और परिवहन जैसे क्षेत्रों में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। इस साझेदारी का उद्देश्य न केवल सरकारी स्तर पर संबंधों को सुधारना है, बल्कि निजी क्षेत्र के निवेश को भी प्रोत्साहित करना है। उज्बेकिस्तान की हालिया आर्थिक सुधारों की नीतियों ने इसे विदेशी निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना दिया है, और सर्बिया इस अवसर का लाभ उठाने के लिए पूरी तरह तैयार दिख रहा है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए इस विकास के गहरे मायने हैं। भारत लंबे समय से अपनी 'कनेक्ट सेंट्रल एशिया' नीति के माध्यम से इस क्षेत्र के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है। उज्बेकिस्तान, भारत का एक महत्वपूर्ण रणनीतिक सहयोगी है और दोनों देश अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) के माध्यम से कनेक्टिविटी बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। सर्बिया और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकी यूरेशियाई क्षेत्र में एक नए भू-राजनीतिक संतुलन का संकेत देती है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ मानते हैं कि मध्य एशिया में बढ़ती स्थिरता और व्यापारिक गतिविधियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए सकारात्मक हैं, जिससे ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों को भी लाभ हो सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सर्बिया द्वारा उज्बेकिस्तान को प्राथमिकता देना वैश्विक स्तर पर बहु-ध्रुवीय कूटनीति के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। जहां एक ओर पश्चिमी देश मध्य एशिया में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं सर्बिया जैसे देश अपनी स्वतंत्र आर्थिक राह तलाश रहे हैं। आने वाले महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रतिनिधिमंडलों के दौरों और संयुक्त आर्थिक आयोगों की बैठकों की संभावना है। यह साझेदारी न केवल व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान के माध्यम से दोनों देशों के लोगों को भी करीब लाएगी।
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