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वरिष्ठ शिक्षाविद और पूर्व एमएलसी बी.टी. देशमुख का निधन; फडणवीस और गडकरी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 07:06 am
महाराष्ट्र के दिग्गज नेता और पांच बार के एमएलसी बी.टी. देशमुख का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन पर देवेंद्र फडणवीस और नितिन गडकरी ने गहरा शोक व्यक्त किया है।
महाराष्ट्र की राजनीति और शिक्षा जगत के एक युग का अंत हो गया है। अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार पांच बार विधान परिषद के सदस्य रहे वरिष्ठ शिक्षाविद और दिग्गज नेता बी.टी. देशमुख का 87 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनके निधन की खबर से न केवल महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में, बल्कि शिक्षा क्षेत्र में भी शोक की लहर दौड़ गई है।
बी.टी. देशमुख, जिन्हें प्यार से 'बी.टी.डी.' के नाम से जाना जाता था, ने लगातार 30 वर्षों (1982 से 2012) तक विधान परिषद में शिक्षकों का प्रतिनिधित्व किया। उन्हें सदन के सबसे विद्वान सदस्यों में गिना जाता था। बजटीय प्रक्रियाओं और विधायी नियमों पर उनकी गहरी पकड़ ने उन्हें पक्ष और विपक्ष दोनों के बीच सम्माननीय बनाया। उन्होंने अपना पूरा जीवन शिक्षकों के अधिकारों, गैर-अनुदानित स्कूलों की समस्याओं और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए समर्पित कर दिया।
उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि देशमुख उनके लिए एक मार्गदर्शक की तरह थे। फडणवीस ने कहा, "बी.टी. देशमुख जी का निधन एक व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने संसदीय लोकतंत्र की गरिमा को बढ़ाया और शिक्षकों के मुद्दों को जिस संजीदगी से उठाया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए उदाहरण रहेगा। उन्होंने हमेशा सत्य का साथ दिया और सिद्धांतों के साथ कभी समझौता नहीं किया।"
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उनके साथ अपने पुराने संबंधों को याद किया। गडकरी ने कहा कि विधान परिषद में उनके साथ काम करना एक सीखने वाला अनुभव था। उन्होंने विशेष रूप से विदर्भ क्षेत्र के विकास और वहां के पिछड़ेपन को दूर करने के लिए देशमुख द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की। गडकरी ने कहा कि विदर्भ वैधानिक विकास बोर्ड के माध्यम से देशमुख ने जो आंकड़े और तर्क प्रस्तुत किए, वे आज भी विकास कार्यों के लिए आधार माने जाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से सिडनी, मेलबर्न और पर्थ में रहने वाले महाराष्ट्रीयन प्रवासियों ने भी उनके निधन पर दुख जताया है। अमरावती और विदर्भ क्षेत्र से आने वाले कई प्रवासी भारतीयों के लिए बी.टी. देशमुख एक प्रेरणास्रोत थे, जिन्होंने शिक्षा के माध्यम से हजारों छात्रों का जीवन बदला। मेलबर्न स्थित एक मराठी मंडल के सदस्य ने कहा कि देशमुख साहब का योगदान केवल राजनीति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे एक ऐसी संस्था थे जिन्होंने महाराष्ट्र की बौद्धिक चेतना को आकार दिया।
उनके अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजनीतिक नेता, शिक्षाविद और उनके पुराने छात्र शामिल होने की उम्मीद है। उनकी विरासत उनके द्वारा लिखे गए लेखों, उनके द्वारा लड़ी गई लड़ाइयों और उन अनगिनत शिक्षकों के माध्यम से जीवित रहेगी जिन्हें उन्होंने समाज में सम्मान दिलाया।
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