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मऊ: अवैध गर्भपात और नवजातों की खरीद-फरोख्त के आरोपों में निजी अस्पताल सील, स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 08:31 pm

मऊ जिले में स्वास्थ्य विभाग ने एक निजी अस्पताल को अवैध गर्भपात और नवजातों के व्यापार के गंभीर आरोपों के बाद सील कर दिया है। प्रशासन मामले की गहन जांच कर रहा है।
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां स्वास्थ्य विभाग ने भारी अनियमितताओं और गंभीर आपराधिक गतिविधियों के आरोपों में एक निजी अस्पताल को सील कर दिया है। इस अस्पताल पर न केवल अवैध रूप से गर्भपात (Abortion) करने का आरोप है, बल्कि यह भी संदिग्ध पाया गया है कि यहां नवजात शिशुओं की खरीद-फरोख्त का एक संगठित रैकेट चलाया जा रहा था। यह कार्रवाई जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की एक संयुक्त टीम द्वारा की गई छापेमारी के बाद हुई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग को लंबे समय से इस अस्पताल की संदिग्ध गतिविधियों के बारे में गोपनीय सूचनाएं मिल रही थीं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि अस्पताल परिसर के भीतर मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) एक्ट के नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा था। इसके साथ ही, अस्पताल के कुछ कर्मचारियों और प्रबंधन पर नवजात बच्चों को अवैध तरीके से बेचने के सौदे करने के भी आरोप लगे हैं। इन सूचनाओं की पुष्टि के लिए विभाग ने एक टीम गठित की और अस्पताल पर औचक छापा मारा।
छापेमारी के दौरान अधिकारियों को अस्पताल में कई आपत्तिजनक दस्तावेज और ऐसे उपकरण मिले, जिनका उपयोग अवैध गर्भपात के लिए किया जा रहा था। जांच टीम को अस्पताल के रिकॉर्ड में भी भारी विसंगतियां मिलीं। कई मरीजों का विवरण दर्ज नहीं था, और कुछ मामलों में प्रक्रिया की अनुमति के बिना ही ऑपरेशन किए गए थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल के संचालन पर रोक लगा दी और पूरे परिसर को पुलिस की मौजूदगी में सील कर दिया।
मऊ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने मीडिया को बताया कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है और अस्पताल के लाइसेंस को रद्द करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे किसी भी संस्थान को बर्दाश्त नहीं करेगा जो मानव जीवन के साथ खिलवाड़ करता हो या कानून के विरुद्ध गतिविधियों में लिप्त हो। पुलिस अब इस मामले में अस्पताल के मालिक और वहां कार्यरत डॉक्टरों की भूमिका की जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस रैकेट के तार और कहां-कहां जुड़े हैं।
यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि प्रवासी भारतीय समुदाय (Diaspora) के लिए भी चिंता का विषय है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के लोग अक्सर अपने परिजनों के इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भारत की व्यवस्था पर निर्भर रहते हैं। इस तरह के घोटाले स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर सवालिया निशान लगाते हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में निजी अस्पतालों द्वारा नियमों की अनदेखी एक बड़ी समस्या बनी हुई है, जिसके लिए सख्त नियामक तंत्र की आवश्यकता है।
वर्तमान में, मामले की जांच जारी है और पुलिस संदिग्धों से पूछताछ कर रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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