राजनीति
'हार्मोज़ जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण अटल': तेहरान ने अमेरिका और ट्रंप को दी कड़ी चेतावनी
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 10:37 am

ईरानी सेना ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा है कि हॉर्मोज़ जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण अपरिवर्तनीय है और वाशिंगटन को इस नई वास्तविकता को स्वीकार करना होगा।
तेहरान और वाशिंगटन के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ईरानी सेना ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक, हॉर्मोज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर एक नई और गंभीर चेतावनी जारी की है। ईरानी सेना के प्रवक्ता, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अक्रमिनिया ने स्पष्ट किया है कि इस रणनीतिक जलमार्ग पर तेहरान का नियंत्रण अब 'अटल और अपरिवर्तनीय' है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका और उसके सहयोगियों को इस नई वास्तविकता को स्वीकार करना होगा, अन्यथा उन्हें इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
जनरल अक्रमिनिया का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की संभावित वापसी और उनकी पिछली 'अधिकतम दबाव' (maximum pressure) की नीति को लेकर चर्चाएं तेज हैं। ईरान ने संकेत दिया है कि वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा। अक्रमिनिया ने कहा कि ईरानी सेना अपनी स्थिति की रक्षा 'अंतिम सांस तक' करने के लिए तैयार है। यह संदेश न केवल अमेरिकी नौसेना के लिए एक सीधी चुनौती है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी खतरे की घंटी है।
हॉर्मोज़ जलडमरूमध्य का महत्व वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। दुनिया के कुल पेट्रोलियम उपभोग का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए, इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार की सैन्य अस्थिरता के गंभीर आर्थिक परिणाम हो सकते हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है, और आपूर्ति में कोई भी बाधा घरेलू ईंधन की कीमतों में भारी उछाल ला सकती है।
ऑस्ट्रेलियाई परिप्रेक्ष्य में देखें तो, हालांकि ऑस्ट्रेलिया एक ऊर्जा निर्यातक है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतों में होने वाली वृद्धि सीधे तौर पर सिडनी से पर्थ तक ऑस्ट्रेलियाई उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालती है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा और व्यापार मार्गों की स्वतंत्रता भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि इस क्षेत्र में अशांति से वैश्विक लॉजिस्टिक्स और शिपिंग लागत बढ़ जाती है, जिससे अंततः दैनिक वस्तुओं की कीमतें प्रभावित होती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह आक्रामक बयानबाजी ट्रंप प्रशासन की भविष्य की नीतियों के खिलाफ एक प्रतिरोधक क्षमता (deterrence) बनाने की कोशिश है। ट्रंप के पिछले कार्यकाल में ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए गए थे और जनरल कासिम सुलेमानी की हत्या के बाद दोनों देशों के बीच युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो गई थी। तेहरान अब यह दिखाना चाहता है कि वह किसी भी सैन्य दबाव का सामना करने के लिए पहले से कहीं अधिक सक्षम है। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अमेरिकी नौसेना की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं, जो इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बनाए हुए है।
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