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इंदौर में ‘गर्भ सहेली’ और ‘गीता सखी’ की शुरुआत: गर्भवती महिलाओं के लिए नया संबल और परामर्श तंत्र
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 09:37 am

इंदौर में गर्भवती महिलाओं की सहायता के लिए 'गर्भ सहेली' और 'गीता सखी' पहल की शुरुआत की गई है, जो स्वास्थ्य और मानसिक संबल प्रदान करेगी।
इंदौर, मध्य प्रदेश: गर्भावस्था एक ऐसा पड़ाव है जहां एक महिला शारीरिक बदलावों के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक उथल-पुथल से भी गुजरती है। इस संवेदनशील समय में सही मार्गदर्शन और भावनात्मक सहयोग की कमी अक्सर तनाव का कारण बनती है। इसी आवश्यकता को समझते हुए इंदौर में ‘गर्भ सहेली’ और ‘गीता सखी’ नामक दो विशेष पहलों की शुरुआत की गई है। इनका मुख्य उद्देश्य गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के नौ महीनों के दौरान आने वाली हर छोटी-बड़ी समस्या का समाधान देना और उन्हें एक सुरक्षित वातावरण प्रदान करना है।
‘गर्भ सहेली’ पहल मुख्य रूप से स्वास्थ्य, पोषण और दैनिक जीवनचर्या पर केंद्रित है। अक्सर यह देखा जाता है कि पहली बार मां बन रही महिलाओं के मन में खान-पान, व्यायाम और शारीरिक असहजता को लेकर कई शंकाएं होती हैं। ‘गर्भ सहेली’ के माध्यम से विशेषज्ञों की एक टीम महिलाओं को यह बताएगी कि किस समय क्या खाना चाहिए, कौन से व्यायाम सुरक्षित हैं और बेचैनी होने पर तत्काल क्या कदम उठाए जाने चाहिए। यह सेवा एक भरोसेमंद मित्र की तरह काम करेगी, जिससे महिलाओं को डॉक्टर के पास जाने से पहले की बुनियादी सलाह घर पर ही मिल सकेगी।
दूसरी ओर, ‘गीता सखी’ का दृष्टिकोण अधिक आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक है। भारतीय संस्कृति में ‘गर्भ संस्कार’ का विशेष महत्व रहा है, और यह पहल उसी परंपरा को आधुनिक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। ‘गीता सखी’ के माध्यम से महिलाओं को मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और तनाव प्रबंधन के तरीके सिखाए जाएंगे। इसमें गीता के उपदेशों और नैतिक कहानियों के माध्यम से महिला के मन को शांत रखने का प्रयास किया जाएगा, जिसका सीधा सकारात्मक प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर भी पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में जब संयुक्त परिवार (Joint Families) का चलन कम हो रहा है, ऐसी पहलों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में रहने वाले भारतीय प्रवासियों (NRIs) के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है। विदेश में रह रही भारतीय महिलाएं अक्सर अपने परिवार से दूर होने के कारण अकेलापन महसूस करती हैं। इंदौर की यह पहल एक ऐसा मॉडल पेश करती है जिसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से वैश्विक स्तर पर भी अपनाया जा सकता है।
इंदौर के स्थानीय प्रशासन और सामुदायिक संगठनों ने इस पहल को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए व्यापक योजना बनाई है। इसके तहत न केवल परामर्श सत्र आयोजित किए जाएंगे, बल्कि स्वयंसेवकों का एक नेटवर्क भी तैयार किया जा रहा है जो जरूरत पड़ने पर महिलाओं के लिए उपलब्ध रहेगा। यह परियोजना राजनीति और समाजसेवा के उस संगम को दर्शाती है जहां लोक कल्याण को प्राथमिकता दी गई है। आने वाले समय में इन सेवाओं का विस्तार अन्य शहरों में करने की भी योजना है ताकि हर महिला की मातृत्व यात्रा सुखद और सुरक्षित बन सके।
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