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ईरान पर अमेरिका के हमले लगातार छठे दिन जारी, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा

ICN24 Newsroom 17 जुल॰ 2026, 09:33 am
ईरान पर अमेरिका के हमले लगातार छठे दिन जारी, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा

अमेरिका ने समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा का हवाला देते हुए ईरान पर लगातार छठी रात हमले किए हैं। इस तनाव का असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों पर पड़ सकता है।

संयुक्त राज्य अमेरिका की सेना ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखते हुए लगातार छठी रात भी हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को नष्ट करना है जो होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर रही हैं। ईरान के सरकारी मीडिया ने कई प्रमुख सैन्य ठिकानों के पास भारी विस्फोटों की पुष्टि की है, जिससे क्षेत्र में युद्ध की स्थिति और गंभीर हो गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए आवश्यक थी। होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण मार्गों में से एक है, और यहाँ किसी भी प्रकार की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है। वाशिंगटन ने स्पष्ट किया है कि जब तक व्यावसायिक जहाजों पर खतरों को पूरी तरह से समाप्त नहीं कर दिया जाता, तब तक उनके अभियान जारी रहेंगे। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय और व्यापक प्रवासी समाज के लिए यह घटनाक्रम चिंता का विषय है। वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा आने से ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है, जो पहले से ही महंगाई से जूझ रहे परिवारों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है। इसके अलावा, भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के कई लोग रसद (logistics) और समुद्री परिवहन क्षेत्र से जुड़े हैं, जहाँ सुरक्षा जोखिम बढ़ने की संभावना है। भारत के लिए भी यह स्थिति रणनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण है। वैश्विक समुद्री कार्यबल में भारतीय नाविकों की एक बड़ी हिस्सेदारी है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ता तनाव उन हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा को खतरे में डालता है जो प्रतिदिन इन खतरनाक जलमार्गों से गुजरते हैं। साथ ही, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस मार्ग पर बहुत अधिक निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो इसके परिणाम केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेंगे। ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में आपूर्ति श्रृंखला में देरी और माल ढुलाई की लागत बढ़ने से घरेलू बाजार में उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ सकते हैं। फिलहाल, वैश्विक समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इन हमलों का क्या जवाब देता है और क्या कूटनीतिक रास्तों से इस तनाव को कम किया जा सकता है।
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