राजनीति
विद्यार्थी निजी विद्यालयों से निकलकर शासकीय सांदीपनि विद्यालयों में ले रहे प्रवेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
ICN24 Newsroom 18 जुल॰ 2026, 09:34 am
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्य प्रदेश में शिक्षा के बदलते स्वरूप और 'सांदीपनि' स्कूलों की बढ़ती लोकप्रियता पर जोर दिया है, जो पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा का मेल हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था में आ रहे सकारात्मक बदलावों को रेखांकित करते हुए एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में मध्य प्रदेश के शासकीय सांदीपनि विद्यालयों की गुणवत्ता इतनी बढ़ गई है कि विद्यार्थी निजी स्कूलों को छोड़कर इन सरकारी संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने यह बात भोपाल में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान कही, जहाँ उन्होंने प्रदेश की शैक्षिक प्रगति और सांस्कृतिक विरासत के सामंजस्य पर अपने विचार साझा किए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सनातन संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हमारी सभ्यता हमेशा से ही 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' और 'वसुधैव कुटुंबकम' के सिद्धांतों पर आधारित रही है। उन्होंने भगवान कृष्ण और उनके बाल सखा सुदामा के प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल ज्ञान अर्जन नहीं, बल्कि मैत्री, समानता और जनकल्याण का भाव जागृत करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सांदीपनि आश्रम की परंपरा को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़कर राज्य सरकार बच्चों का सर्वांगीण विकास कर रही है।
शासकीय स्कूलों की बदलती छवि पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बुनियादी ढांचे में सुधार और शिक्षकों के समर्पण ने अभिभावकों का विश्वास जीता है। सांदीपनि विद्यालयों (जिन्हें पीएम श्री और सीएम राइज की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है) में मिलने वाली आधुनिक सुविधाओं, खेलकूद के अवसरों और नैतिक शिक्षा ने इन्हें निजी स्कूलों का एक सशक्त विकल्प बना दिया है। मध्य प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर बच्चा, चाहे वह किसी भी आर्थिक पृष्ठभूमि से हो, विश्व स्तरीय शिक्षा प्राप्त कर सके।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है, क्योंकि प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में शिक्षा सुधारों और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति गहरी रुचि रखते हैं। डॉ. यादव ने अपने संबोधन में यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय ज्ञान परंपरा को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के माध्यम से मुख्यधारा में लाना उनकी सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जब विद्यार्थी अपनी जड़ों से जुड़कर आधुनिक विज्ञान और तकनीक सीखेंगे, तभी वे वैश्विक मंच पर भारत का नाम रोशन कर पाएंगे।
अंत में मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों का आह्वान किया कि वे इसी सेवा भाव के साथ कार्य करते रहें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश न केवल देश में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शिक्षा व्यवस्था के लिए पहचाना जाएगा।
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