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अमेरिकी कंपनियों के दबाव में ग्रीन कार्ड नियमों पर झुकी बाइडन सरकार, भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 05:31 pm
अमेरिकी कंपनियों के दबाव में ग्रीन कार्ड नियमों पर झुकी बाइडन सरकार, भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत

अमेरिकी व्यापारिक समूहों और दिग्गज टेक कंपनियों के विरोध के बाद जो बाइडन प्रशासन ने विवादित ग्रीन कार्ड नीति पर अपने रुख में नरमी दिखाई है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है।

वाशिंगटन: अमेरिका में स्थाई निवास (ग्रीन कार्ड) की प्रक्रिया को लेकर हाल ही में उपजे विवाद के बीच जो बाइडन प्रशासन ने अपने रुख में नरमी दिखाई है। 'द वॉशिंगटन पोस्ट' की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी व्यापार जगत और विशेषकर तकनीकी क्षेत्र के दिग्गजों द्वारा किए गए कड़े विरोध के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। इस खबर से अमेरिका में कार्यरत लाखों भारतीय आईटी पेशेवरों को बड़ी राहत मिली है, जो प्रस्तावित नीति के कारण अपनी नौकरी और निवास को लेकर चिंतित थे। विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी नागरिकता और आप्रवासन सेवा (USCIS) ने एक नई नीति पेश की। इसके तहत अमेरिका में कार्यरत कई विदेशी नागरिकों के लिए यह अनिवार्य किया जा रहा था कि वे स्थाई निवास या ग्रीन कार्ड के आवेदन के लिए अपने मूल देश वापस लौटें। इस नीति के लागू होने से न केवल पेशेवरों का करियर प्रभावित होता, बल्कि अमेरिकी कंपनियों के लिए भी अपने कुशल कार्यबल को बनाए रखना मुश्किल हो जाता। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नीति के सामने आते ही अमेरिकी चैंबर ऑफ कॉमर्स, बड़े सीईओ और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) क्षेत्र की कंपनियों ने व्हाइट हाउस, होमलैंड सिक्योरिटी और श्रम विभाग के साथ गोपनीय चर्चाएं शुरू कर दीं। व्यापारिक समूहों ने चेतावनी दी कि यदि यह नीति सख्ती से लागू की गई, तो अमेरिकी अर्थव्यवस्था और नवाचार (innovation) को भारी नुकसान होगा। निजी चर्चाओं और ईमेल के माध्यम से हुए इस संवाद का परिणाम यह हुआ कि पिछले सप्ताह के अंत तक प्रशासन के लहजे में स्पष्ट बदलाव आया। USCIS के अधिकारियों ने निजी तौर पर व्यापारिक नेताओं को आश्वासन दिया कि अधिकांश वर्क वीजा पर इस नीति का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। विभाग ने स्पष्ट किया कि स्थाई निवास की मांग करने वाले अधिकांश प्रवासियों को देश छोड़ने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, इस संबंध में अभी आधिकारिक दिशानिर्देशों का इंतजार है। नेशनल इमिग्रेशन फोरम की अध्यक्ष जेनी मरे ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए कहा कि व्यापारिक समुदाय ने प्रशासन के साथ सीधे तौर पर अपनी चिंताएं साझा की हैं। उन्होंने खुशी जताई कि सरकार इन चिंताओं को सुन रही है और अमेरिकी व्यापारिक हितों के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। यह घटनाक्रम ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। कई भारतीय पेशेवर जो ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं या जिनके परिवार के सदस्य अमेरिका में एच-1बी (H-1B) वीजा पर हैं, वे इस नीतिगत बदलाव पर बारीकी से नजर रख रहे थे। अमेरिका की आप्रवासन नीतियों में कोई भी बड़ा बदलाव वैश्विक स्तर पर प्रतिभाओं के प्रवास (migration patterns) को प्रभावित करता है। फिलहाल, अमेरिकी प्रशासन के इस रुख से भारतीय तकनीकी विशेषज्ञों को अपने ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया सुचारू रहने की उम्मीद जगी है।
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