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'OPT खत्म होना चाहिए': अमेरिकी सीनेटर के प्रस्ताव से भारतीय छात्रों में हलचल, H-1B का रास्ता होगा मुश्किल
ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:23 am
फ्लोरिडा के सीनेटर मार्को रुबियो ने 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) कार्यक्रम को समाप्त करने के लिए नया विधेयक पेश किया है, जिससे भारतीय छात्रों का अमेरिकी वर्क वीजा सपना प्रभावित हो सकता है।
अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हजारों भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी चिंताजनक खबर सामने आ रही है। फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सीनेटर मार्को रुबियो ने एक नया विधायी प्रस्ताव पेश किया है, जिसका उद्देश्य 'ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग' (OPT) कार्यक्रम को पूरी तरह से समाप्त करना है। यह कार्यक्रम वर्तमान में विदेशी छात्रों को उनकी डिग्री पूरी करने के बाद अमेरिका में काम करने की अनुमति देता है और इसे अक्सर H-1B वर्क वीजा प्राप्त करने की पहली सीढ़ी माना जाता है।
सीनेटर रुबियो ने अपने बयान में कहा कि जब वह अमेरिकी नागरिकों को OPT के बारे में बताते हैं, तो वे यह जानकर 'हैरान' रह जाते हैं कि विदेशी छात्र बिना वर्क वीजा के सालों तक देश में काम कर सकते हैं। रुबियो का तर्क है कि यह व्यवस्था अमेरिकी कामगारों के हितों के खिलाफ है और विदेशी कंपनियों को कम लागत पर श्रम उपलब्ध कराने का एक जरिया बन गई है। प्रस्तावित विधेयक का लक्ष्य इस 'लूपहोल' को बंद करना है, जिसे रुबियो अमेरिकी श्रम बाजार के लिए खतरा मानते हैं।
भारतीय समुदाय के लिए इसके मायने अत्यंत गंभीर हैं। अमेरिका में पढ़ रहे अंतरराष्ट्रीय छात्रों में भारतीयों की संख्या सबसे अधिक है, और उनमें से एक बड़ा हिस्सा STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) क्षेत्रों से जुड़ा है। वर्तमान नियमों के तहत, STEM स्नातक छात्र OPT के माध्यम से तीन साल तक अमेरिका में कार्य अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। इसी अवधि के दौरान कंपनियां उनके लिए H-1B वीजा के लिए आवेदन करती हैं। यदि OPT समाप्त होता है, तो छात्रों के पास पढ़ाई के तुरंत बाद देश छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा, जिससे वर्क वीजा हासिल करना लगभग असंभव हो जाएगा।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर प्रासंगिक है। वैश्विक स्तर पर विकसित देश अपनी आव्रजन नीतियों को सख्त कर रहे हैं। जिस तरह अमेरिका में OPT पर हमला हो रहा है, उसी तरह ऑस्ट्रेलिया ने भी हाल ही में अपने 'टेम्परेरी ग्रेजुएट वीजा' (सबक्लास 485) के नियमों में कड़े बदलाव किए हैं। आयु सीमा को घटाकर 35 वर्ष करना और अंग्रेजी भाषा की आवश्यकताओं को बढ़ाना इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही देशों में भारतीय छात्र 'पोस्ट-स्टडी वर्क राइट्स' को प्राथमिकता देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो अमेरिका की ओर भारतीय छात्रों का रुझान कम हो सकता है। हालांकि, अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में इस बिल को पारित कराना आसान नहीं होगा, क्योंकि कई बड़ी टेक कंपनियां OPT का समर्थन करती हैं। वे इसे प्रतिभा को आकर्षित करने का सबसे प्रभावी तरीका मानती हैं। फिलहाल, यह प्रस्ताव केवल एक राजनीतिक कदम है, लेकिन इसने भविष्य की अनिश्चितताओं को जन्म दे दिया है। ICN24 इस मामले पर अपनी नजर बनाए रखेगा ताकि हमारे दर्शकों को अंतरराष्ट्रीय आव्रजन नीतियों में हो रहे हर बदलाव की सटीक जानकारी मिलती रहे।
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