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अमेरिकी सीनेट में शरणार्थी नीति पर तीखी बहस: ग्रेस मेंग और मार्को रुबियो के बीच श्वेत अफ्रीकी शरणार्थियों पर टकराव

ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 02:00 am
अमेरिकी सीनेट में शरणार्थी नीति पर तीखी बहस: ग्रेस मेंग और मार्को रुबियो के बीच श्वेत अफ्रीकी शरणार्थियों पर टकराव

अमेरिकी कांग्रेस में शरणार्थी नीतियों को लेकर बहस तेज हो गई है, जहाँ जनप्रतिनिधि ग्रेस मेंग ने मार्को रुबियो द्वारा श्वेत दक्षिण अफ्रीकी शरणार्थियों के समर्थन पर सवाल उठाए हैं।

वॉशिंगटन में अमेरिकी विधायकों के बीच शरणार्थी नीति और नस्लीय प्राथमिकताओं को लेकर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। न्यूयॉर्क की प्रतिनिधि ग्रेस मेंग ने फ्लोरिडा के सीनेटर मार्को रुबियो पर तीखा हमला बोला है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब रुबियो ने दक्षिण अफ्रीका के श्वेत किसानों को शरणार्थी का दर्जा देने और उन्हें अमेरिका में बसाने का समर्थन किया। मेंग ने इस रुख की आलोचना करते हुए इसे चुनिंदा और भेदभावपूर्ण बताया। बहस के दौरान मेंग ने तर्क दिया कि जब दुनिया के कई हिस्सों में लोग वास्तविक युद्ध और हिंसा का सामना कर रहे हैं, तो केवल एक विशिष्ट समूह को प्राथमिकता देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा, "हम लोगों को संघर्ष क्षेत्रों (Conflict Zones) में वापस भेज रहे हैं, जबकि कुछ लोग केवल राजनीतिक आधार पर कुछ खास समूहों को बचाने की बात कर रहे हैं।" मेंग का इशारा उन शरणार्थियों की ओर था जिन्हें हैती या मध्य अमेरिका जैसे अशांत क्षेत्रों से आने के बावजूद अमेरिका में प्रवेश नहीं मिल पा रहा है। मार्को रुबियो और उनके समर्थकों का दावा है कि दक्षिण अफ्रीका में श्वेत अल्पसंख्यकों, विशेषकर किसानों को लक्षित हिंसा और भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। उनका तर्क है कि इन परिस्थितियों में उन्हें मानवीय आधार पर सुरक्षा मिलनी चाहिए। हालांकि, मेंग ने इस तर्क को खारिज करते हुए इसे आव्रजन प्रणाली का राजनीतिकरण करार दिया। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह बहस विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया ने भी अतीत में दक्षिण अफ्रीकी श्वेत किसानों को मानवीय वीज़ा देने पर विचार किया था, जिस पर काफी विवाद हुआ था। भारतीय प्रवासियों के लिए, जो अक्सर योग्यता-आधारित और निष्पक्ष आव्रजन नीतियों की वकालत करते हैं, यह घटनाक्रम दर्शाता है कि पश्चिमी देशों में शरणार्थी कोटा और मानवीय वीज़ा अक्सर जटिल राजनीतिक और नस्लीय विमर्श का हिस्सा बन जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल शरणार्थियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की व्यापक आव्रजन नीति में मौजूद गहरी दरारों को दर्शाता है। जहाँ एक ओर रिपब्लिकन नेता सीमा सुरक्षा और विशिष्ट समूहों के संरक्षण की बात कर रहे हैं, वहीं डेमोक्रेट्स समावेशी और व्यापक सुधारों पर जोर दे रहे हैं। आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा अमेरिकी सीनेट में और अधिक गरमा सकता है, जिसका असर वैश्विक आव्रजन विमर्श पर भी पड़ना तय है।
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