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अमेरिकी ग्रीन कार्ड नीति: राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में नरमी, कार्य वीजा पर पाबंदियों के आसार कम

ICN24 Newsroom 7 जून 2026, 05:30 am
अमेरिकी ग्रीन कार्ड नीति: राष्ट्रपति ट्रंप के रुख में नरमी, कार्य वीजा पर पाबंदियों के आसार कम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीन कार्ड नियमों पर अपने कड़े रुख में नरमी के संकेत दिए हैं। व्यापारिक संगठनों के दबाव के बाद अब वर्क वीजा और स्थायी निवास की राह आसान होने की उम्मीद है।

वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी आव्रजन नीतियों, विशेष रूप से ग्रीन कार्ड और वर्क वीजा को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत दिए हैं। हालिया बयानों में राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी व्यापारिक घरानों और उद्योग जगत के दबाव के कारण वह कार्य वीजा (Work Visa) नियमों को और अधिक कड़ा नहीं करेंगे। यह खबर उन हजारों पेशेवर कामगारों के लिए राहत लेकर आई है, जो अमेरिका में स्थायी निवास और रोजगार की संभावनाओं को लेकर चिंतित थे। ट्रंप प्रशासन की पिछली नीतियों में अक्सर 'अमेरिका फर्स्ट' के नारे के तहत आव्रजन पर सख्त नियंत्रण देखा गया था। हालांकि, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कुशल श्रम की कमी और तकनीकी क्षेत्र के दिग्गजों की मांग के बीच, अब प्रशासन के रुख में लचीलापन आता दिख रहा है। राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि वह नहीं चाहते कि देश की आर्थिक प्रगति में सहायक बनने वाले कुशल कामगारों के लिए रास्ते बंद हों। विशेष रूप से टेक और हेल्थकेयर जैसे क्षेत्रों में विदेशी पेशेवरों की भारी मांग है। इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए भी महत्वपूर्ण है। कई भारतीय मूल के ऑस्ट्रेलियाई नागरिक और वहां रह रहे भारतीय पेशेवर अमेरिका को अपने करियर के अगले पड़ाव के रूप में देखते हैं। अमेरिका की ग्रीन कार्ड नीति में किसी भी तरह की ढील वैश्विक प्रतिभाओं के स्थानांतरण (Global Talent Mobility) को बढ़ावा देती है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के बीच अक्सर पेशेवरों का आदान-प्रदान होता रहता है, और अमेरिकी नीतियों में नरमी से अंतरराष्ट्रीय श्रम बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक संगठनों ने राष्ट्रपति को इस बात के लिए राजी किया है कि यदि वर्क वीजा की राह में बाधाएं उत्पन्न की गईं, तो अमेरिकी कंपनियां अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त खो सकती हैं। सिलिकॉन वैली से लेकर वॉल स्ट्रीट तक, नियोक्ताओं ने तर्क दिया है कि नवाचार को बनाए रखने के लिए दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को आकर्षित करना आवश्यक है। ट्रंप के इस बदले हुए स्वर से एच-1बी और अन्य रोजगार-आधारित वीजा श्रेणियों के भविष्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। निष्कर्ष के तौर पर, हालांकि अभी आधिकारिक नीतिगत दस्तावेज आना बाकी है, लेकिन राष्ट्रपति का यह आश्वासन कि वह व्यापार मालिकों की चिंताओं को समझते हैं, आव्रजन सुधारों की दिशा में एक नया मोड़ है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के लिए, जो अक्सर बहु-राष्ट्रीय करियर की योजना बनाते हैं, अमेरिका का यह बदला हुआ रुख नए अवसरों के द्वार खोल सकता है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये मौखिक आश्वासन जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी नियमों में तब्दील होते हैं।
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