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अमेरिका ने 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था की खत्म; अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रुकने के नियमों में अब होगी सख्ती

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 04:53 am
अमेरिका ने 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' व्यवस्था की खत्म; अंतरराष्ट्रीय छात्रों के रुकने के नियमों में अब होगी सख्ती

अमेरिका ने छात्र वीजा के लिए 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) व्यवस्था को समाप्त कर दिया है। अब 4 साल से अधिक की पढ़ाई के लिए छात्रों को वीजा विस्तार के लिए अलग से आवेदन करना होगा।

वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों और विनिमय आगंतुकों (exchange visitors) के लिए दशकों पुरानी 'ड्यूरेशन ऑफ स्टेटस' (D/S) व्यवस्था को समाप्त करने का औपचारिक निर्णय लिया है। इस बड़े नीतिगत बदलाव का सीधा असर अमेरिका में पढ़ रहे हजारों भारतीय छात्रों पर पड़ेगा। अब तक, D/S व्यवस्था के तहत छात्रों को तब तक अमेरिका में रहने की अनुमति थी, जब तक वे अपने शैक्षणिक कार्यक्रम का पालन कर रहे थे, चाहे उसमें कितना भी समय लगे। नए नियमों के अनुसार, अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों (F-1 वीजा) और शोधकर्ताओं (J-1 वीजा) को एक निश्चित अवधि के लिए ही प्रवेश दिया जाएगा। यदि किसी छात्र का पाठ्यक्रम चार वर्ष से अधिक समय लेता है, तो उन्हें अपने प्रवास को बढ़ाने के लिए औपचारिक रूप से विस्तार (extension) के लिए आवेदन करना होगा। अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि इस कदम से विदेशी छात्रों की निगरानी में सुधार होगा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। साथ ही, इससे उन लोगों पर लगाम कसी जा सकेगी जो शिक्षा के बहाने अनिश्चित काल तक देश में बने रहते हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ऑस्ट्रेलिया में बसे कई भारतीय परिवारों के बच्चे उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका का रुख करते हैं। ऑस्ट्रेलिया में भी हाल के महीनों में छात्र वीजा नियमों को लेकर काफी सख्ती देखी गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वैश्विक स्तर पर विकसित देश अब 'अस्थायी प्रवास' को लेकर अधिक सतर्क हो रहे हैं। सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले कई प्रवासियों का मानना है कि अमेरिका के इस कदम से अंतरराष्ट्रीय शिक्षा के क्षेत्र में अनिश्चितता बढ़ेगी और छात्रों पर दस्तावेजीकरण का बोझ बढ़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव से उन छात्रों को सबसे अधिक परेशानी होगी जो पीएचडी या लंबे शोध कार्यों में लगे हैं, क्योंकि ऐसे कार्यक्रमों में अक्सर चार साल से अधिक का समय लगता है। अब इन छात्रों को समय-समय पर आव्रजन अधिकारियों के पास अपनी प्रगति का प्रमाण देना होगा। यदि कोई छात्र नियमों का पालन करने में विफल रहता है या उसका विस्तार आवेदन खारिज हो जाता है, तो उसे तुरंत देश छोड़ना पड़ सकता है। ICN24 की रिपोर्ट के अनुसार, यह नई नीति केवल नए छात्रों पर ही नहीं, बल्कि भविष्य में मौजूदा छात्रों के नवीनीकरण पर भी लागू हो सकती है। प्रवासन वकीलों ने चेतावनी दी है कि इससे 'वीजा ओवरस्टे' के मामलों में कमी आ सकती है, लेकिन यह ईमानदार छात्रों के लिए मानसिक और वित्तीय तनाव का कारण बनेगा। भारतीय प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों के आव्रजन दस्तावेजों और समयसीमा पर कड़ी नजर रखें ताकि किसी भी कानूनी जटिलता से बचा जा सके।
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