राजनीति
ईरान पर अमेरिका का लगातार चौथे दिन हमला; ट्रंप ने बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की कड़ी चेतावनी दी
ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 04:31 pm

अमेरिका ने ईरान पर लगातार चौथे दिन हवाई हमले जारी रखे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो बिजली संयंत्र और पुल अगले निशाने पर होंगे।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच जारी तनाव अब एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के भीतर सामरिक ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। पेंटागन द्वारा पुष्टि की गई इन कार्यवाहियों ने मध्य पूर्व में बड़े पैमाने पर युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। इन हमलों का मुख्य उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना बताया जा रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस पर गहरी चिंता व्यक्त कर रहा है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन हमलों के बाद एक कड़ा बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ईरान जल्द ही किसी समझौते की मेज पर नहीं आता है, तो अमेरिका अगले सप्ताह से ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाना शुरू कर सकता है। ट्रंप ने विशेष रूप से बिजली स्टेशनों और प्रमुख पुलों का उल्लेख किया, जो किसी भी देश की अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन की रीढ़ होते हैं। उन्होंने कहा, "ईरान के पास अब भी समय है, लेकिन विफलता के परिणाम बेहद गंभीर होंगे।"
मध्य पूर्व में छिड़ा यह संघर्ष केवल भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है। इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों पर भी पड़ने की संभावना है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष चिंता का विषय है, क्योंकि इस क्षेत्र में भारी अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर परिवहन और खाद्य सामग्री की लागत को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके अलावा, ऑस्ट्रेलिया में बसे लाखों भारतीय प्रवासियों के परिवार और रिश्तेदार खाड़ी देशों (GCC) में कार्यरत हैं। यदि यह संघर्ष ईरान से बाहर फैलता है, तो दुबई, कतर और कुवैत जैसे क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां पैदा हो सकती हैं, जिससे भारतीय मूल के लोगों की आजीविका और सुरक्षा पर संकट आ सकता है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई नागरिक इस घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।
राजनयिक स्तर पर, भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही शांति की अपील कर रहे हैं। भारत के लिए ईरान एक महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रदाता और रणनीतिक साझेदार रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी गठबंधन का एक प्रमुख हिस्सा है। वर्तमान स्थिति में, यदि कूटनीति विफल रहती है, तो न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि दुनिया भर में प्रवासियों की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ट्रंप प्रशासन के अगले कदम और ईरान की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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