राजनीति
3 विधायक और 3 पार्षदों के बावजूद वार्ड-52 बेहाल: जलभराव और गंदगी से जूझ रही कानपुर की जनता
ICN24 Newsroom 15 जुल॰ 2026, 05:31 pm
कानपुर के वार्ड-52 में तीन विधायकों और तीन पार्षदों के रहने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं। जलभराव और गंदगी से परेशान जनता अब जनप्रतिनिधियों से जवाब मांग रही है।
कानपुर के वार्ड-52 (गीता नगर) की स्थिति ने भारतीय शहरी प्रशासन की विडंबना को उजागर कर दिया है। इस वार्ड को 'वीआईपी' माना जाता है क्योंकि यहाँ तीन विधायक, दो मनोनीत पार्षद और एक निर्वाचित पार्षद का निवास है। विडंबना यह है कि इतनी भारी-भरकम राजनीतिक मौजूदगी के बावजूद, आम नागरिक आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। दैनिक भास्कर द्वारा किए गए 'वार्ड परिक्रमा' सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि यहाँ की व्यवस्था जनप्रतिनिधियों के घरों की दहलीज तक तो सीमित है, लेकिन कुछ ही कदमों की दूरी पर बदहाली का बोलबाला है।
वार्ड के शारदा नगर, गीता नगर और विनायकपुर जैसे इलाकों में स्थिति चिंताजनक है। यहाँ मामूली बारिश के बाद भी सड़कें तालाब बन जाती हैं। जल निकासी की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण एलिम्को और एलआईसी सोसाइटी जैसे क्षेत्रों में लोगों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी चुनाव आते हैं, नेता बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जीतने के बाद वे केवल अपने आवास के आसपास की सड़कों और सफाई का ध्यान रखते हैं, जबकि मोहल्लों की आंतरिक गलियां जर्जर पड़ी हैं।
छोटा लखनपुर इलाके की स्थिति और भी बदतर है। यहाँ के निवासियों ने बताया कि वर्षों से मांग करने के बावजूद आज तक सीवर और पेयजल की पाइपलाइन नहीं डाली गई है। नालियां कचरे से अटी पड़ी हैं, जिससे कीड़े-मकोड़े और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। मीरा राजपूत और सुमन मिश्रा जैसी स्थानीय महिलाओं का कहना है कि गंदगी के कारण बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में है। सफाई कर्मचारी नियमित रूप से नहीं आते और खाली प्लॉट कूड़े के डंपिंग ग्राउंड बन चुके हैं। फॉगिंग न होने से मच्छरों का आतंक बढ़ गया है, जिससे संक्रामक रोगों का खतरा मंडरा रहा है।
क्षेत्र के सार्वजनिक स्थलों की हालत भी कुछ अलग नहीं है। विनायकपुर का तिकुनिया पार्क भ्रष्टाचार का केंद्र बन चुका है। स्थानीय निवासी जितेंद्र सिंह का आरोप है कि पार्क की बाउंड्री वॉल मरम्मत के नाम पर हर दो साल में सरकारी बजट निकाला जाता है, लेकिन कुछ ही समय बाद दीवार फिर से ढह जाती है। पार्क में नई बेंचें तो लगा दी गई हैं, लेकिन चारों ओर गंदगी और टूटी बाउंड्री शासन के दावों की पोल खोल रही है।
यह केवल एक वार्ड की समस्या नहीं है, बल्कि कानपुर के वार्ड-73 और वार्ड-42 (परमट) में भी इसी तरह के हालात देखे गए हैं। वार्ड-73 में विधायक आवास के ठीक बाहर कूड़े का ढेर लगा है, जबकि वार्ड-42 में मेयर प्रमिला पांडेय के निवास के बावजूद श्रद्धालु गंदे पानी से गुजरकर मंदिर जाने को मजबूर हैं। जनप्रतिनिधियों की यह उदासीनता न केवल स्थानीय प्रशासन की विफलता है, बल्कि उन मतदाताओं के साथ विश्वासघात भी है जो बेहतर कल की उम्मीद में वोट देते हैं। फिलहाल, वार्ड-52 की जनता केवल आश्वासन की नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस काम की उम्मीद कर रही है।
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