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अमेरिका में H-1B वीजा नियमों को सख्त करने की तैयारी: क्या भारतीय पेशेवरों पर गिरेगी गाज?

ICN24 Newsroom 6 जून 2026, 03:30 am
अमेरिका में H-1B वीजा नियमों को सख्त करने की तैयारी: क्या भारतीय पेशेवरों पर गिरेगी गाज?

अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पेश एक नए विधेयक में H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलावों का प्रस्ताव दिया गया है, जो भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए पीआर की राह मुश्किल कर सकता है।

वाशिंगटन में एक रिपब्लिकन सांसद द्वारा पेश किए गए नए विधेयक ने अमेरिका में काम कर रहे और वहां जाने का सपना देख रहे भारतीय पेशेवरों के बीच हलचल पैदा कर दी है। 'अमेरिकन जॉब्स फर्स्ट एक्ट' नामक इस विधायी प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य H-1B वीजा कार्यक्रम में आमूल-चूल परिवर्तन करना है। यदि यह कानून बनता है, तो यह उस पारंपरिक मार्ग को बंद कर सकता है जिसके माध्यम से कुशल विदेशी कर्मचारी अंततः ग्रीन कार्ड या स्थायी निवास प्राप्त करते हैं। विधेयक के मुख्य प्रस्तावों में नियोक्ताओं के लिए न्यूनतम वेतन सीमा को बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना शामिल है कि विदेशी पेशेवरों की नियुक्ति से अमेरिकी कामगारों के वेतन या नौकरी की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। सबसे चिंताजनक पहलू वह प्रावधान है जो H-1B वीजा को एक 'विशुद्ध रूप से अस्थायी' श्रेणी में बदलने की वकालत करता है। इसका मतलब है कि वीजा धारक अपनी स्थिति को स्थायी निवास (ग्रीन कार्ड) में बदलने के लिए पात्र नहीं होंगे, जो वर्तमान में हजारों भारतीयों के लिए अमेरिका में बसने का मुख्य जरिया है। सांख्यिकीय रूप से, भारत H-1B वीजा का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है, जिसमें हर साल जारी होने वाले कुल वीजा का लगभग 70% से अधिक हिस्सा भारतीयों के पास जाता है। सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों से लेकर वॉल स्ट्रीट तक, भारतीय इंजीनियरों और विश्लेषकों की मांग हमेशा बनी रहती है। इस नए विधेयक के समर्थकों का तर्क है कि इससे स्थानीय अमेरिकी प्रतिभाओं को प्राथमिकता मिलेगी, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह अमेरिका की नवाचार क्षमता को कम कर सकता है और वैश्विक प्रतिभाओं को अन्य देशों की ओर मोड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भी इसके अप्रत्यक्ष निहितार्थ हो सकते हैं। अक्सर देखा गया है कि जब अमेरिका अपनी आव्रजन नीतियों को सख्त करता है, तो वैश्विक स्तर पर उच्च-कुशल पेशेवर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों को प्राथमिकता देने लगते हैं। ऑस्ट्रेलिया की 'पॉइंट-बेस्ड' इमिग्रेशन प्रणाली और हाल ही में घोषित 'वीजा फॉर स्किल्स' रणनीतियां उन लोगों के लिए एक आकर्षक विकल्प बन सकती हैं जो अमेरिका के अनिश्चित भविष्य से बचना चाहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विधेयक को कानून बनने के लिए अभी लंबी विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा और इसे सीनेट में कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस तरह के प्रस्तावों का बार-बार सामने आना इस बात का संकेत है कि अमेरिका में विदेशी कार्यबल को लेकर राजनीतिक माहौल बदल रहा है। भारतीय पेशेवरों के लिए अब केवल कौशल ही काफी नहीं है, बल्कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नीतियों के बदलते रुख पर भी पैनी नजर रखनी होगी।
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