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यूपी में गोमूत्र खरीद का पायलट प्रोजेक्ट: किसानों की आय और जैविक खेती को बढ़ावा देने की कितनी है तैयारी?
ICN24 Newsroom 11 अग॰ 2026, 01:37 pm

उत्तर प्रदेश सरकार ने बुलंदशहर के 15 गांवों में ₹10 प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए एक महत्वाकांक्षी पहल की शुरुआत की है। राज्य के बुलंदशहर जिले के 15 गांवों में गोमूत्र खरीद का एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इस योजना के तहत, किसानों और पशुपालकों से 10 रुपये प्रति लीटर की दर से गोमूत्र खरीदा जा रहा है। इस कदम को न केवल कृषि आय बढ़ाने के तरीके के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह राज्य में जैविक खेती (Organic Farming) को बढ़ावा देने की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस परियोजना का मुख्य केंद्र बुलंदशहर का आनंद भवन क्षेत्र और आसपास के गांव हैं। स्थानीय प्रशासन और पशुपालन विभाग के सहयोग से इस खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाया गया है। एकत्रित किए गए गोमूत्र का उपयोग जैविक कीटनाशकों और उर्वरकों के निर्माण में किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है, जिससे उन किसानों को बड़ी राहत मिलेगी जो दूध न देने वाली गायों के रख-रखाव को आर्थिक बोझ मानते हैं।
भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में छुट्टा पशुओं की समस्या एक गंभीर राजनीतिक और आर्थिक मुद्दा रही है। कई मामलों में, किसान बूढ़ी या दूध न देने वाली गायों को छोड़ देते हैं, जिससे फसलों का नुकसान होता है। सरकार का तर्क है कि यदि गोमूत्र की बिक्री से एक निश्चित आय सुनिश्चित होती है, तो पशुपालक इन गायों को आवारा छोड़ने के बजाय पालने के लिए प्रोत्साहित होंगे। यह योजना 'वेस्ट-टू-वेल्थ' (कचरे से कंचन) के सिद्धांत पर आधारित है, जो ग्रामीण भारत में आत्मनिर्भरता लाने की क्षमता रखती है।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए, जो अक्सर भारत की कृषि उन्नति और ग्रामीण विकास में गहरी रुचि रखते हैं, यह खबर विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया में भी ऑर्गेनिक उत्पादों और टिकाऊ खेती की मांग बढ़ रही है। यूपी की यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे सस्टेनेबल एग्रीकल्चर (Sustainable Agriculture) के रुझानों के अनुरूप है। प्रवासी भारतीय जो अपने पैतृक गांवों में निवेश करते हैं, वे इस तरह के मॉडलों को एक नए बिजनेस अवसर के रूप में देख सकते हैं।
हालांकि, इस योजना की सफलता इसके कार्यान्वयन और पारदर्शिता पर निर्भर करेगी। गोमूत्र की शुद्धता की जांच, भंडारण की सुविधा और फिर उसे बाजार तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत लॉजिस्टिक नेटवर्क की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि 10 रुपये प्रति लीटर की कीमत किसानों के लिए आकर्षक तो है, लेकिन इसकी निरंतरता बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। फिलहाल, बुलंदशहर के किसान इस बदलाव को सकारात्मक रूप में देख रहे हैं, और उम्मीद कर रहे हैं कि यह योजना उनकी आर्थिक स्थिति सुधारने में मील का पत्थर साबित होगी।
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