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अपर बाजार के व्यापारियों ने नगर निगम के खिलाफ खोला मोर्चा; कहा- रोजी-रोटी के लिए करेंगे आखिरी सांस तक संघर्ष
ICN24 Newsroom 8 अग॰ 2026, 01:38 am

रांची के अपर बाजार के व्यापारियों ने नगर निगम के नोटिस के खिलाफ एकजुट होकर आंदोलन की चेतावनी दी है। व्यापारियों का कहना है कि यह उनकी रोजी-रोटी का सवाल है।
झारखंड की राजधानी रांची का हृदय स्थल माना जाने वाला अपर बाजार इन दिनों प्रशासनिक कार्रवाई और व्यापारियों के कड़े विरोध का केंद्र बना हुआ है। नगर निगम द्वारा हाल ही में जारी किए गए नोटिसों के विरोध में शुक्रवार को अपर बाजार के व्यापारियों ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में व्यापारियों ने स्पष्ट कर दिया कि वे अपनी दुकानों और आजीविका की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं।
किरायेदार संघ की इस विशेष बैठक के बाद संघ के अध्यक्ष मुकेश कुमार अग्रवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि नगर निगम की इस कार्रवाई से न केवल व्यापारियों, बल्कि उनके परिवारों के सामने भी गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वर्षों से अपना व्यवसाय कर रहे छोटे और मंझोले व्यापारियों को बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के निशाना बनाया जा रहा है। अग्रवाल ने कड़े शब्दों में कहा, "नगर निगम के ये नोटिस सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी पर हमला हैं। हम अपनी अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे और अपनी दुकानों को उजड़ने नहीं देंगे।"
व्यापारियों का तर्क है कि अपर बाजार शहर का सबसे पुराना व्यावसायिक केंद्र है और यहाँ के ढांचे दशकों पुराने हैं। उनका कहना है कि नियमों की आड़ में उन्हें उजाड़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि वे शहर की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देते रहे हैं। बैठक के दौरान व्यापारियों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि यदि निगम अपनी कार्रवाई नहीं रोकता है, तो वे उग्र आंदोलन और भूख हड़ताल जैसे कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।
इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेषकर वे जो मूल रूप से झारखंड और रांची से ताल्लुक रखते हैं, इस खबर को लेकर चिंतित हैं। प्रवासी भारतीयों (NRIs) का एक बड़ा हिस्सा आज भी अपने पैतृक व्यवसाय और संपत्ति के माध्यम से रांची से जुड़ा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में रहने वाले रांची मूल के निवासियों का कहना है कि इस तरह की अनिश्चितता से न केवल स्थानीय व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि उन परिवारों की स्थिरता पर भी असर पड़ता है जो विदेश से अपनी जड़ों की ओर देखते हैं।
व्यापारी संघ ने अब मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्रियों से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी मुख्य मांग है कि पुराने ढांचों के लिए एक विशेष नीति बनाई जाए जिससे व्यापारियों का विस्थापन न हो। आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने के आसार हैं, क्योंकि एक तरफ निगम नियमों का हवाला दे रहा है, तो दूसरी तरफ व्यापारियों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
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