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शेख हसीना के दिल्ली संबोधन पर भारत ने झाड़ा पल्ला, बांग्लादेश की आपत्ति को किया खारिज
ICN24 Newsroom 8 अग॰ 2026, 12:37 am
भारत ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली में शेख हसीना का हालिया कार्यक्रम एक निजी आयोजन था और सरकार वहां दिए गए किसी भी बयान का समर्थन नहीं करती है।
भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पूर्व बांग्लादेशी प्रधानमंत्री शेख हसीना द्वारा दिल्ली में आयोजित एक हालिया प्रेस कार्यक्रम पर पड़ोसी देश की कड़ी आपत्ति को सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि इस कार्यक्रम का आयोजन पूरी तरह से निजी स्तर पर किया गया था और भारत सरकार वहां व्यक्त किए गए किसी भी विचार या बयान का समर्थन नहीं करती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब ढाका में अंतरिम सरकार और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक स्पष्ट खिंचाव देखा जा रहा है।
प्रेस ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "वह एक निजी कार्यक्रम था। हम वहां कहे गए किसी भी बयान का समर्थन नहीं करते हैं।" भारत का यह स्पष्टीकरण ढाका द्वारा व्यक्त किए गए उस रोष के बाद आया है, जिसमें बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने हसीना के दिल्ली में सार्वजनिक रूप से बोलने को 'बांग्लादेश की संप्रभुता का अपमान' करार दिया था। बांग्लादेशी अधिकारियों का तर्क है कि भारत में शरण ले रही पूर्व प्रधानमंत्री को राजनीतिक बयानबाजी से बचना चाहिए, क्योंकि इससे द्विपक्षीय संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
अगस्त 2024 में छात्रों के नेतृत्व वाले व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद शेख हसीना को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था और वे सुरक्षित ठिकाने की तलाश में भारत आ गई थीं। तब से, भारत और बांग्लादेश के संबंधों में एक 'अनईजी रीसेट' (असहज पुनर्गठन) देखा जा रहा है। पिछले एक दशक में दोनों देशों ने 'सुनहरे युग' का आनंद लिया था, लेकिन हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद सुरक्षा चिंताओं और कूटनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव आया है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह कूटनीतिक तनाव विशेष चिंता का विषय है। दक्षिण एशियाई राजनीति में होने वाले ये बदलाव ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय और बांग्लादेशी प्रवासियों के बीच सामाजिक और व्यापारिक संवाद को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की कूटनीतिक नोक-झोंक क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है। ऑस्ट्रेलिया में दक्षिण एशियाई मूल के लोग क्षेत्र में शांति और निरंतर आर्थिक सहयोग की उम्मीद रखते हैं, ताकि उनके पारिवारिक और व्यावसायिक हित सुरक्षित रहें।
फिलहाल, भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है कि हसीना की उपस्थिति मानवीय आधार पर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत उनकी राजनीतिक गतिविधियों को प्रायोजित कर रहा है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार और भारत के बीच विश्वास की बहाली किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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