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अयोध्या राम मंदिर: 'कोई घोटाला नहीं हुआ', ₹3300 करोड़ का हिसाब सही; सरकारी सूत्रों ने अफवाहों पर लगाया विराम
ICN24 Newsroom 7 अग॰ 2026, 05:37 pm

अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों को सरकार ने खारिज कर दिया है। ₹3300 करोड़ का हिसाब पूरी तरह सही पाया गया है, हालांकि कुछ प्रशासनिक चूक की बात कही गई है।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए आए चंदे और ट्रस्ट की वित्तीय स्थिति को लेकर पिछले कुछ समय से चल रही अटकलों पर अब विराम लगता नजर आ रहा है। सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी या भ्रष्टाचार के दावे पूरी तरह निराधार हैं। जांच और ऑडिट के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि मंदिर निर्माण के लिए अब तक जुटाए गए लगभग 3300 करोड़ रुपये का हिसाब-किताब पूरी तरह पारदर्शी और सटीक है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में यह दावा किया जा रहा था कि मंदिर के चंदे में भारी हेराफेरी हुई है। हालांकि, सरकारी सूत्रों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा है कि ट्रस्ट की बैलेंस शीट और बैंक खातों का मिलान पूरी तरह सही पाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, कुल एकत्रित राशि का एक-एक पैसा रिकॉर्ड में है। जहां तक 'हेराफेरी' की बात है, सूत्रों ने संकेत दिया है कि कुछ चुनिंदा जमीनी सौदों या स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कुछ तकनीकी खामियां जरूर देखी गई हैं, जिन्हें 'घोटाला' कहना गलत होगा।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में रहने वाले हजारों प्रवासी भारतीयों ने राम मंदिर निर्माण के लिए 'निधि समर्पण अभियान' के तहत दिल खोलकर दान दिया था। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय मूल के नागरिकों के बीच इस बात को लेकर गहरी चिंता थी कि उनके द्वारा भेजी गई राशि का सही उपयोग हो रहा है या नहीं। सरकार के इस ताजा स्पष्टीकरण से प्रवासी भारतीयों और अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं में विश्वास बहाल होने की उम्मीद है।
ट्रस्ट के सूत्रों का कहना है कि मंदिर निर्माण का कार्य अपने अंतिम चरणों में है और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए समय-समय पर ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाती रही है। कुछ जमीन खरीद के मामलों में जो विवाद उठे थे, उन्हें भी कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर सुलझा लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी परियोजना में कुछ प्रक्रियात्मक देरी या त्रुटियां होना स्वाभाविक है, लेकिन इसे जानबूझकर किया गया घोटाला बताना अनुचित है।
ICN24 से बात करते हुए, कुछ सामुदायिक प्रतिनिधियों ने कहा कि वे इस स्पष्टीकरण का स्वागत करते हैं। उनका मानना है कि अयोध्या न केवल एक धार्मिक केंद्र है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है, इसलिए इसकी मर्यादा और पारदर्शिता पर किसी भी प्रकार का दाग नहीं लगना चाहिए। फिलहाल, ट्रस्ट अब मंदिर परिसर के विस्तार और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विकास पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है।
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