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UNHCR रिपोर्ट 2025: वैश्विक विस्थापन में भारी उछाल, इजरायल-ईरान संघर्ष और भारत की बढ़ती चुनौतियां
ICN24 Newsroom 24 जून 2026, 02:26 pm
यूएनएचसीआर की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में जबरन विस्थापन के आंकड़े रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं, जिसमें भारत सहित एशिया और अफ्रीका के देशों पर सबसे अधिक दबाव है।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) द्वारा जारी 2025 की नवीनतम रिपोर्ट ने वैश्विक स्तर पर जबरन विस्थापन की एक भयावह तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध, उत्पीड़न और जलवायु परिवर्तन के कारण अपने घरों से भागने को मजबूर लोगों की संख्या अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। विशेष रूप से, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने मध्य पूर्व में एक नया मानवीय संकट पैदा कर दिया है, जिससे न केवल उस क्षेत्र में बल्कि वैश्विक सुरक्षा और प्रवास पैटर्न पर भी गहरा प्रभाव पड़ा है।
रिपोर्ट के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक यह तथ्य है कि दुनिया के सबसे धनी देश शरणार्थियों को आश्रय देने में पीछे हैं। इसके विपरीत, एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के निम्न और मध्यम आय वाले देश सबसे अधिक विस्थापित लोगों को शरण दे रहे हैं। आईएनसी24 (ICN24) के विश्लेषण के अनुसार, यह डेटा उन पश्चिमी देशों के दावों के विपरीत है जो अक्सर अपने यहाँ 'शरणार्थी संकट' की बात करते हैं। वास्तविकता यह है कि वैश्विक शरणार्थी आबादी का एक बड़ा हिस्सा विकासशील राष्ट्रों की सीमाओं के भीतर ही रह रहा है।
भारत के संदर्भ में, रिपोर्ट घरेलू और क्षेत्रीय दोनों चुनौतियों को उजागर करती है। भारत वर्तमान में न केवल पड़ोसी देशों जैसे म्यांमार और श्रीलंका से आने वाले शरणार्थियों को आश्रय प्रदान कर रहा है, बल्कि देश के भीतर 'आंतरिक विस्थापन' और बेघर होने की समस्या भी गंभीर है। प्राकृतिक आपदाओं और जलवायु परिवर्तन के कारण भारत के तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों से लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। यद्यपि भारत 1951 के शरणार्थी सम्मेलन का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, फिर भी यहाँ की मानवीय परंपराओं ने इसे क्षेत्रीय स्थिरता का एक केंद्र बनाए रखा है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह रिपोर्ट विशेष महत्व रखती है। ऑस्ट्रेलिया की मानवीय वीज़ा नीतियां और प्रशांत क्षेत्र में इसकी भूमिका अक्सर वैश्विक विस्थापन के इन रुझानों से प्रभावित होती है। ऑस्ट्रेलिया में बसे प्रवासियों के लिए, दक्षिण एशिया में बढ़ती अस्थिरता और संघर्षों का सीधा प्रभाव उनके परिवारों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ता है। इजरायल-ईरान संघर्ष ने ईंधन की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को भी प्रभावित किया है, जिसका असर भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई व्यापार और प्रेषण (remittances) पर देखा जा सकता है।
निष्कर्ष के तौर पर, UNHCR 2025 की रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अधिक न्यायसंगत बोझ-साझाकरण (burden-sharing) का आह्वान करती है। जब तक शक्तिशाली देश संघर्षों को रोकने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाते, तब तक विस्थापन का यह चक्र जारी रहेगा। भारत और अन्य एशियाई देशों द्वारा किए जा रहे प्रयासों को वैश्विक स्तर पर मान्यता और वित्तीय सहायता मिलने की आवश्यकता है ताकि इस मानवीय संकट को और गहराने से रोका जा सके।
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