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ब्रिटेन 'ग्रूमिंग गैंग' रिपोर्ट: 95% अपराधी पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम, रिपोर्ट में 'एशियन' शब्द के इस्तेमाल पर उठाए गए सवाल
ICN24 Newsroom 21 जून 2026, 03:12 am

ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव की स्वतंत्र जांच रिपोर्ट ने दावा किया है कि ब्रिटेन में यौन शोषण करने वाले ग्रूमिंग गैंग्स में 95% पुरुष पाकिस्तानी मुस्लिम हैं।
ब्रिटेन में ग्रूमिंग गैंग्स और उनके द्वारा किए गए यौन अपराधों को लेकर एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। ब्रिटिश सांसद रूपर्ट लोव द्वारा संचालित एक स्वतंत्र जांच में दावा किया गया है कि इन अपराधों में शामिल 95 प्रतिशत अपराधी पाकिस्तानी मूल के मुस्लिम पुरुष हैं। इस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद न केवल ब्रिटेन, बल्कि वैश्विक स्तर पर दक्षिण एशियाई समुदायों के बीच बहस छिड़ गई है। लोव ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से इन्हें 'पाकिस्तानी मुस्लिम रेप गैंग्स' कहकर संबोधित किया है और अब तक इस्तेमाल किए जा रहे 'एशियन ग्रूमिंग गैंग' जैसे सामान्य शब्दों को खारिज कर दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में ब्रिटेन भर में लगभग 2,50,000 युवा लड़कियों को इन गिरोहों द्वारा प्रताड़ित किया गया और उनका यौन शोषण किया गया। लोव ने तर्क दिया कि 'एशियन' शब्द का उपयोग करने से अपराधियों की वास्तविक जातीय और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि छिप जाती है। इसका खामियाजा ब्रिटेन में रहने वाले अन्य एशियाई समुदायों, विशेष रूप से भारतीय, हिंदू और सिख समुदायों को भुगतना पड़ता है, क्योंकि सामान्य शब्दावली के कारण उनकी छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लोव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "उन्हें 'एशियन' कहना बंद करें। वे जापानी नहीं हैं। वे मुख्य रूप से पाकिस्तानी मुस्लिम रेप गैंग हैं।"
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। अक्सर पश्चिमी मीडिया और सरकारी रिपोर्टों में 'एशियन' या 'साउथ एशियन' शब्दों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे अपराधी और कानून का पालन करने वाले नागरिकों के बीच का अंतर धुंधला हो जाता है। इस रिपोर्ट ने स्पष्ट किया है कि कैसे एक विशिष्ट समूह के कार्यों के कारण पूरे एशियाई डायस्पोरा को संदेह की दृष्टि से देखा जाता रहा है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ये अपराधी अक्सर श्वेत ब्रिटिश लड़कियों को निशाना बनाते थे और उनके प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते थे। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सिख लड़कियों को भी निशाना बनाया गया था, हालांकि समुदाय द्वारा उठाए गए एहतियाती कदमों के बाद ऐसी घटनाओं में कमी आई है। जांच में सरकारी संस्थानों, पुलिस और मीडिया की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट का दावा है कि 'इस्लामोफोबिक' या 'नस्लवादी' कहलाने के डर से अधिकारियों और मुख्यधारा के मीडिया ने दशकों तक इन अपराधियों की पहचान छिपाए रखी, जिससे यह नेटवर्क और अधिक फलता-फूलता रहा।
सांसद लोव ने इसे एक बड़ी 'संस्थागत विफलता' करार दिया है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक शुचिता और सामाजिक लेबल के डर ने हजारों लड़कियों के जीवन को बर्बाद होने दिया। यह रिपोर्ट उत्तरजीविताओं के बयानों, अदालती रिकॉर्ड और व्हिसलब्लोअर्स की गवाही पर आधारित है। अब इस खुलासे के बाद ब्रिटेन में कानून प्रवर्तन एजेंसियों और नीति निर्माताओं पर दबाव बढ़ रहा है कि वे इस समस्या की जड़ को समझें और बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
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