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उज्जैन महाकाल मंदिर ऑडिट: लापता रिकॉर्ड और वित्तीय खर्चों पर ऑडिट विभाग ने जताई कड़ी आपत्ति

ICN24 Newsroom 10 जुल॰ 2026, 06:31 am
उज्जैन महाकाल मंदिर ऑडिट: लापता रिकॉर्ड और वित्तीय खर्चों पर ऑडिट विभाग ने जताई कड़ी आपत्ति

उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर के ऑडिट में 10.11 लाख रुपये के बिना अनुमति वाले खर्च और गायब रिकॉर्ड्स को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर एक बार फिर प्रशासनिक सुर्खियों में है। मंदिर के हालिया ऑडिट में वित्तीय अनियमितताओं और रिकॉर्ड के रखरखाव में गंभीर कमियों का खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट में न केवल महत्वपूर्ण दस्तावेजों के गायब होने की बात कही गई है, बल्कि उन खर्चों पर भी सवाल उठाए गए हैं जिनके लिए मंदिर प्रबंधन समिति से औपचारिक अनुमति नहीं ली गई थी। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, प्रोटोकॉल व्यवस्थाओं, जिसमें वीआईपी मेहमानों के लिए लड्डू प्रसाद, उपहार और आतिथ्य शामिल है, पर लगभग 10.11 लाख रुपये खर्च किए गए। रिपोर्ट में विशेष रूप से इस बात पर आपत्ति जताई गई है कि यह भारी-भरकम राशि मंदिर प्रबंधन समिति द्वारा किसी औपचारिक प्रस्ताव या संकल्प (Resolution) के माध्यम से स्वीकृत नहीं की गई थी। सरकारी नियमों के अनुसार, किसी भी बड़े खर्च के लिए समिति की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होती है, जिसका इस मामले में उल्लंघन पाया गया है। इसके अलावा, ऑडिट में कई वित्तीय रिकॉर्ड और दस्तावेजों के न मिलने पर भी चिंता व्यक्त की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्षों के कई महत्वपूर्ण वाउचर और रसीदें गायब हैं, जिससे मंदिर के खातों का मिलान करना मुश्किल हो रहा है। यह मामला केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और विदेशों में रहने वाले लाखों भक्तों की आस्था से भी जुड़ा है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, जो नियमित रूप से उज्जैन के महाकाल मंदिर में दान भेजते हैं और 'भस्म आरती' के दर्शन के लिए भारत यात्रा करते हैं, यह खबर विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीयों (NRIs) के बीच मंदिर कोष के प्रबंधन में पारदर्शिता हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले भक्त, जो डिजिटल माध्यमों से दान करते हैं, मंदिर प्रशासन से उच्च स्तर की जवाबदेही की अपेक्षा करते हैं। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए, महाकाल मंदिर के प्रशासक प्रथम कौशिक ने स्थानीय मीडिया को बताया कि मंदिर प्रबंधन को अभी तक ऑडिट रिपोर्ट की आधिकारिक प्रति प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट मिलने के बाद ही विभाग द्वारा उठाए गए बिंदुओं का विस्तार से अध्ययन किया जाएगा और आवश्यक स्पष्टीकरण दिए जाएंगे। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि प्रोटोकॉल खर्च अक्सर आकस्मिक होते हैं और मेहमानों के स्वागत की परंपरा का हिस्सा हैं। हालांकि, ऑडिट विभाग का तर्क है कि बिना दस्तावेजी प्रमाण और समिति की अनुमति के सरकारी या सार्वजनिक ट्रस्ट के पैसे का इस तरह उपयोग वित्तीय नियमों का उल्लंघन है। फिलहाल, यह देखना होगा कि आने वाले दिनों में मंदिर प्रशासन इन आपत्तियों का क्या समाधान पेश करता है और क्या गायब रिकॉर्ड्स को दोबारा बहाल किया जा सकेगा।
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