राजनीति
दक्षिण अफ्रीका में बढ़ती नस्लीय हिंसा: युगांडा ने अपने नागरिकों को सुरक्षित वापस बुलाना शुरू किया
ICN24 Newsroom 4 जुल॰ 2026, 05:31 am

दक्षिण अफ्रीका में बढ़ती प्रवासियों के खिलाफ हिंसा और प्रदर्शनों के बीच युगांडा ने अपने 273 नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस बुला लिया है।
दक्षिण अफ्रीका में बढ़ती नस्लीय हिंसा और प्रवासियों के खिलाफ हो रहे हिंसक प्रदर्शनों के बीच युगांडा सरकार ने अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बड़े पैमाने पर स्वदेश वापसी अभियान शुरू किया है। शुक्रवार की सुबह 273 युगांडा वासियों का पहला जत्था जोहान्सबर्ग के ओ.आर. टैम्बो अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे से एक चार्टर्ड विमान के जरिए एंटेबे अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पहुँचा। यह कदम दक्षिण अफ्रीका में प्रवासियों के खिलाफ बढ़ते असंतोष और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर उठाया गया है।
युगांडा के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह प्रत्यावर्तन अभियान राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी के उस निर्देश के बाद शुरू किया गया है, जिसमें उन्होंने विदेशी धरती पर अपने नागरिकों के कल्याण और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही थी। युगांडा मीडिया सेंटर के माध्यम से जारी एक आधिकारिक बयान में, दक्षिण अफ्रीका में युगांडा के राजदूत पॉल अमोरु ने पुष्टि की कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने बताया कि अन्य उड़ानों की भी व्यवस्था की जा रही है। शुक्रवार को ही दो अन्य उड़ानों के जरिए कुल 149 और नागरिकों के वापस लौटने की संभावना है।
दक्षिण अफ्रीका में प्रवासन को लेकर बढ़ता तनाव केवल युगांडा तक सीमित नहीं है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून की शुरुआत से अब तक 35,000 से अधिक लोगों को स्वदेश वापस भेजा गया है या निर्वासित किया गया है। सीमा प्रबंधन प्राधिकरण के कार्यवाहक आयुक्त डेविड चिलेम्बे ने बताया कि सबसे बड़ी संख्या जिम्बाब्वे और मलावी के नागरिकों की है। अकेले बुधवार को अधिकारियों ने 2,400 से अधिक लोगों की फाइलें निपटाईं, जिनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जो हिंसा के डर से स्वेच्छा से देश छोड़ना चाहते थे।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए दक्षिण अफ्रीका की यह स्थिति चिंता का विषय है। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लगभग 13 लाख लोग रहते हैं, और वहाँ की अस्थिरता अक्सर वैश्विक प्रवासी समुदायों को प्रभावित करती है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले कई भारतीय परिवारों के रिश्तेदार दक्षिण अफ्रीका में बसे हुए हैं। नस्लीय हिंसा की ऐसी घटनाएं प्रवासियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण अफ्रीका में बढ़ती बेरोजगारी और आर्थिक संकट ने स्थानीय लोगों के मन में विदेशी प्रवासियों के प्रति नफरत भर दी है।
फिलहाल, दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने प्रवासन कानूनों को सख्त कर दिया है और अवैध प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि इस कार्रवाई की आड़ में निर्दोष प्रवासियों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। युगांडा सरकार का कहना है कि वे अपने हर उस नागरिक की सहायता करेंगे जो इस समय असुरक्षित महसूस कर रहा है और वापस आना चाहता है।
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