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UDISE+ 2025-26: भारत में स्कूली शिक्षा में बड़ा सुधार, ड्रॉपआउट दर में भारी गिरावट और शिक्षकों की रिकॉर्ड संख्या

ICN24 Newsroom 8 जुल॰ 2026, 05:31 pm
UDISE+ 2025-26: भारत में स्कूली शिक्षा में बड़ा सुधार, ड्रॉपआउट दर में भारी गिरावट और शिक्षकों की रिकॉर्ड संख्या

शिक्षा मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में स्कूली ड्रॉपआउट दरों में कमी आई है और माध्यमिक स्तर पर नामांकन में ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।

भारत के शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली (UDISE+) 2025-26 की नवीनतम रिपोर्ट ने देश की स्कूली शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक और ऐतिहासिक बदलाव की ओर संकेत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने न केवल स्कूली शिक्षा के बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) छात्रों की संख्या में भारी कमी दर्ज की है, बल्कि उच्चतर माध्यमिक स्तर पर नामांकन और शिक्षकों की कुल संख्या के मामले में भी नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर में सबसे अधिक गिरावट देखी गई है, जो पिछले कई दशकों से भारतीय शिक्षा प्रणाली के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी। सरकार की विभिन्न योजनाओं, जैसे 'समग्र शिक्षा' और मध्याह्न भोजन योजना के सुदृढ़ीकरण ने छात्रों को स्कूलों से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। रिपोर्ट के अनुसार, लिंग समानता के मोर्चे पर भी भारत ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जहां छात्राओं के नामांकन और उनके स्कूल में बने रहने की दर में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शिक्षक-छात्र अनुपात के मामले में, 2025-26 के शैक्षणिक वर्ष में भारत में शिक्षकों की संख्या अब तक के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है। नए शिक्षकों की भर्ती और डिजिटल शिक्षा के समावेश ने ग्रामीण क्षेत्रों में भी शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद की है। रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि स्कूलों में बुनियादी ढांचे, जैसे बिजली, पेयजल और शौचालय की सुविधाओं में सुधार हुआ है, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण भारत में शैक्षिक माहौल बदला है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय (NRI/OCI) के लिए यह रिपोर्ट विशेष महत्व रखती है। प्रवासी भारतीय अक्सर भारत में कौशल विकास और प्रतिभा पूल पर करीब से नज़र रखते हैं। स्कूली शिक्षा में यह सुधार न केवल भारत की भावी कार्यबल की गुणवत्ता को दर्शाता है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी आश्वस्तकारी है जो भारत के साथ शैक्षिक आदान-प्रदान या भविष्य में भारत वापसी पर विचार कर रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में इस प्रकार की संरचनात्मक प्रगति भारत के 'विकसित भारत' के लक्ष्य की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ड्रॉपआउट दर में कमी का सीधा संबंध राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के प्रभावी कार्यान्वयन से है। व्यावसायिक शिक्षा के समावेश और प्रारंभिक बचपन की देखभाल (ECCE) पर बढ़ते ध्यान ने छात्रों के लिए स्कूली शिक्षा को अधिक आकर्षक और प्रासंगिक बना दिया है। हालांकि, रिपोर्ट यह भी चेतावनी देती है कि शिक्षा की गुणवत्ता और डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए अभी भी निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
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