राजनीति
UAE ने टैंकर पर ईरानी हमले की कड़ी निंदा की, कहा- यह UN प्रस्तावों का 'खुला उल्लंघन' है
ICN24 Newsroom 9 अग॰ 2026, 04:37 am

संयुक्त अरब अमीरात ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ADNOC के तेल टैंकर पर ईरानी हमले को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का गंभीर उल्लंघन बताया है।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के एक तेल टैंकर पर ईरान द्वारा की गई आक्रामकता की कड़ी निंदा की है। यूएई के विदेश मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में इस घटना को न केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का उल्लंघन बताया गया है, बल्कि इसे संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का भी 'खुला उल्लंघन' करार दिया गया है। यह घटना मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए एक बड़े खतरे के रूप में देखी जा रही है।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने जोर देकर कहा कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती हैं। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस तरह की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाएं। अबू धाबी का कहना है कि यह हमला केवल एक टैंकर पर नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के बुनियादी ढांचे पर प्रहार है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहाँ से दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा गुजरता है।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह खबर विशेष महत्व रखती है। गल्फ देशों, विशेषकर यूएई में लाखों भारतीय प्रवासी काम करते हैं, जिनमें से एक बड़ी संख्या समुद्री और तेल क्षेत्र (Maritime and Oil Sector) से जुड़ी है। इस तरह की घटनाओं से वहां काम कर रहे भारतीय नाविकों और तेल कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर ऑस्ट्रेलिया में ईंधन की कीमतों और महंगाई पर पड़ेगा, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए वैश्विक बाजारों पर निर्भर है।
सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि ईरान और यूएई के बीच बढ़ती यह तनातनी क्षेत्रीय स्थिरता के लिए घातक हो सकती है। पिछले कुछ महीनों में इस क्षेत्र में जहाजों को निशाना बनाए जाने की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिनसे अंतरराष्ट्रीय बीमा दरों में वृद्धि हुई है और शिपिंग कंपनियों के बीच डर का माहौल बना है। भारत, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आयात करता है, इस क्षेत्र में शांति बनाए रखने का हिमायती रहा है।
यूएई ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता और अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। बयान में आगे कहा गया है कि ऐसे उकसावे वाले कृत्यों से क्षेत्र की शांति भंग होती है और यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के सिद्धांतों के विपरीत है। फिलहाल, यूएई ने इस मामले को संयुक्त राष्ट्र में उठाने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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