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आज का इतिहास: जब गांधीजी ने दिया 'करो या मरो' का नारा और नागासाकी पर हुआ परमाणु प्रहार
ICN24 Newsroom 9 अग॰ 2026, 05:37 am
9 अगस्त का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और वैश्विक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो भारत छोड़ो आंदोलन और नागासाकी त्रासदी की याद दिलाता है।
9 अगस्त का दिन विश्व इतिहास और विशेष रूप से भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पन्नों में एक अमिट छाप रखता है। यह दिन न केवल एक राष्ट्र की संप्रभुता के लिए किए गए सबसे बड़े संकल्प का साक्षी है, बल्कि मानवता के इतिहास में युद्ध की विभीषिका का सबसे काला अध्याय भी इसी दिन लिखा गया था। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए, जो अपनी जड़ों और वैश्विक शांति के मूल्यों से गहराई से जुड़ा है, यह दिन आत्मनिरीक्षण और गौरव का संगम है।
वर्ष 1942 में आज ही के दिन राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के नेतृत्व में 'भारत छोड़ो आंदोलन' (Quit India Movement) की औपचारिक शुरुआत हुई थी। बॉम्बे (अब मुंबई) के गोवालिया टैंक मैदान से गांधीजी ने देशवासियों को 'करो या मरो' का ऐतिहासिक मंत्र दिया था। इस आंदोलन ने ब्रिटिश हुकूमत की चूलें हिला दीं और यह स्पष्ट कर दिया कि अब भारतीय जनता पूर्ण स्वराज से कम किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं है। हालांकि इस दौरान कांग्रेस के लगभग सभी बड़े नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन देश की जनता ने स्वयं इस आंदोलन की कमान संभाली। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए यह आंदोलन आज भी प्रेरणा का स्रोत है, जो यह सिखाता है कि एकता और दृढ़ संकल्प के साथ किसी भी बड़ी शक्ति का सामना किया जा सकता है।
इतिहास की दूसरी बड़ी और दुखद घटना साल 1945 की है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, अमेरिका ने जापान के नागासाकी शहर पर 'फैट मैन' नाम का परमाणु बम गिराया था। हिरोशिमा पर हुए पहले हमले के ठीक तीन दिन बाद हुए इस प्रहार ने मानवता को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में पल भर में हजारों जिंदगियां खत्म हो गईं और आने वाली पीढ़ियों को भी इसके घातक परिणामों का सामना करना पड़ा। आज भी यह दिन दुनिया भर में परमाणु हथियारों के खिलाफ एक चेतावनी के रूप में मनाया जाता है। शांतिप्रिय देशों के रूप में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही वैश्विक मंचों पर परमाणु निरस्त्रीकरण और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की वकालत करते आए हैं।
इन दो प्रमुख घटनाओं के अलावा, 9 अगस्त का दिन कुछ अन्य महत्वपूर्ण उपलब्धियों के लिए भी जाना जाता है। साल 1173 में आज ही के दिन इटली में दुनिया के सात अजूबों में शुमार 'पीसा की झुकी हुई मीनार' (Leaning Tower of Pisa) का निर्माण कार्य शुरू हुआ था। अपनी वास्तुकला की खामी के कारण प्रसिद्ध हुई यह मीनार आज भी पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। वहीं, साल 1831 में आज ही के दिन अमेरिका में पहली बार भाप के इंजन (Steam Engine) वाली ट्रेन चलाई गई थी, जिसने वैश्विक परिवहन और औद्योगिक क्रांति की दिशा बदल दी।
ICN24 के माध्यम से हम अपने पाठकों को यह याद दिलाना चाहते हैं कि इतिहास केवल अतीत की घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ये भविष्य के लिए सबक हैं। 9 अगस्त हमें एक ओर जहां आजादी के संघर्ष और बलिदान की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर युद्ध के विनाशकारी परिणामों के प्रति सचेत भी करता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई डायस्पोरा के लिए यह दिन अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और एक शांतिपूर्ण भविष्य के निर्माण में अपना योगदान देने का अवसर है।
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