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SAVE एक्ट पर रार: डोनाल्ड ट्रंप ने जॉन थ्यून को समर्थन देने से किया इनकार, अमेरिकी सीनेट में बढ़ा राजनीतिक तनाव

ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 08:37 am
SAVE एक्ट पर रार: डोनाल्ड ट्रंप ने जॉन थ्यून को समर्थन देने से किया इनकार, अमेरिकी सीनेट में बढ़ा राजनीतिक तनाव

अमेरिकी सीनेट में वोटिंग अधिकारों से जुड़े SAVE एक्ट को लेकर डोनाल्ड ट्रंप और जॉन थ्यून के बीच मतभेद गहरा गए हैं, जिससे रिपब्लिकन पार्टी में दरार दिख रही है।

वाशिंगटन डीसी में राजनीतिक तापमान उस समय बढ़ गया जब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सीनेट के बहुमत नेता जॉन थ्यून (John Thune) को अगले कार्यकाल के लिए समर्थन देने से स्पष्ट रूप से इनकार कर दिया। इस विवाद की मुख्य जड़ 'SAVE अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) है, जिसे लेकर रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही दो फाड़ नजर आ रही है। ट्रंप ने थ्यून की कार्यप्रणाली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है, विशेष रूप से सीनेट में इस महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में उनकी विफलता और अगस्त अवकाश (August recess) पर जाने के फैसले को लेकर। SAVE एक्ट, जिसका उद्देश्य मतदान प्रक्रिया में केवल अमेरिकी नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना है, लंबे समय से ट्रंप की प्राथमिकताओं में रहा है। ट्रंप का मानना है कि थ्यून ने डेमोक्रेट नेता चक शूमर के सामने घुटने टेक दिए हैं और बिल को पास कराने के लिए पर्याप्त दबाव नहीं बनाया। हालिया घटनाक्रमों में, थ्यून के कड़े रुख और शूमर के साथ उनके टकराव को कुछ हलकों में 'राजनीतिक ब्लैकमेल' के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ थ्यून ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि SAVE एक्ट को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो विधायी कामकाज ठप हो सकता है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए अमेरिका की यह राजनीतिक उठापटक विशेष महत्व रखती है। अमेरिका में होने वाले नीतिगत बदलावों का सीधा असर वैश्विक लोकतंत्र और आव्रजन नीतियों (migration policies) पर पड़ता है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका में वोटिंग कानूनों को लेकर बढ़ती सख्ती भविष्य में वहां रहने वाले प्रवासी भारतीयों और अन्य समुदायों के नागरिक अधिकारों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, रिपब्लिकन पार्टी के भीतर यह नेतृत्व संघर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनावों से पहले पार्टी की एकजुटता पर भी सवाल खड़े करता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के माध्यम से थ्यून पर निशाना साधते हुए कहा कि सीनेट नेतृत्व को देश की सुरक्षा और चुनावी निष्पक्षता के लिए लड़ना चाहिए, न कि छुट्टियों पर ध्यान देना चाहिए। दूसरी ओर, थ्यून के समर्थकों का तर्क है कि विधायी प्रक्रिया में संख्या बल और प्रक्रियात्मक बाधाएं हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। थ्यून द्वारा शूमर को दी गई चुनौती कि 'SAVE एक्ट पास करें या परिणाम भुगतें', अमेरिकी राजनीति में बढ़ते ध्रुवीकरण को दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक कानून का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह ट्रंप के पार्टी पर नियंत्रण और थ्यून जैसे पारंपरिक रिपब्लिकन नेताओं के बीच वैचारिक युद्ध है। यदि थ्यून ट्रंप का विश्वास जीतने में विफल रहते हैं, तो सीनेट के भीतर रिपब्लिकन नेतृत्व की संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या थ्यून ट्रंप की मांगों के आगे झुकते हैं या अपनी स्वतंत्र रणनीति पर कायम रहते हैं।
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