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NASA का ISRO को बड़ा प्रस्ताव: आर्टेमिस मिशन के जरिए मून बेस प्रोग्राम में शामिल होगा भारत
ICN24 Newsroom 12 अग॰ 2026, 02:37 am
नासा ने इसरो को आर्टेमिस मिशन के तहत मून बेस प्रोग्राम में शामिल होने का न्योता दिया है, जिससे भारत-अमेरिका के बीच अंतरिक्ष संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ेगा।
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (NASA) ने भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) को अपने महत्वाकांक्षी 'मून बेस' कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। यह प्रस्ताव आर्टेमिस समझौते (Artemis Accords) के दायरे में आता है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा पर मानव उपस्थिति को स्थायी बनाना और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए आधार तैयार करना है। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस कदम से दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में वैज्ञानिक और रणनीतिक साझेदारी को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
आर्टेमिस मिशन केवल चंद्रमा पर कदम रखने तक सीमित नहीं है; यह वहां एक आत्मनिर्भर बेस कैंप स्थापित करने की योजना है। नासा का मानना है कि इसरो की हालिया सफलताएं, विशेषकर चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सॉफ्ट लैंडिंग ने वैश्विक स्तर पर भारत की साख बढ़ाई है। भारत की कम लागत और उच्च दक्षता वाली तकनीक नासा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इस सहयोग के तहत दोनों एजेंसियां ओपन साइंटिफिक डेटा साझा करेंगी, जिससे ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने में मदद मिलेगी।
भारत और अमेरिका के बीच यह समझौता केवल दो देशों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक भारतीय समुदाय के लिए भी गर्व का विषय है। ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय मूल के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए भी यह खबर विशेष महत्व रखती है। गौरतलब है कि ऑस्ट्रेलिया भी आर्टेमिस समझौते का एक प्रमुख हस्ताक्षरकर्ता है। ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी (ASA) और इसरो के बीच पहले से ही कई स्तरों पर सहयोग जारी है। ऐसे में, नासा-इसरो की यह नई निकटता त्रिपक्षीय वैज्ञानिक विनिमय के नए द्वार खोल सकती है, जिससे सिडनी से लेकर बेंगलुरु तक के पेशेवरों को लाभ होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि मून बेस प्रोग्राम में भारत की एंट्री से भारतीय निजी अंतरिक्ष स्टार्टअप्स (Space-tech Startups) को भी वैश्विक मंच मिलेगा। समझौते के तहत, भारतीय अंतरिक्ष यात्री भविष्य में नासा के मिशनों के साथ अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) और चंद्रमा की सतह तक जा सकते हैं। अमेरिकी दूतावास ने स्पष्ट किया है कि इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य शांतिपूर्ण अंतरिक्ष अन्वेषण और पारदर्शी डेटा शेयरिंग है।
यह निमंत्रण ऐसे समय में आया है जब भारत अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' और मानव मिशन 'गगनयान' पर तेजी से काम कर रहा है। नासा के साथ जुड़ने से इसरो को डीप स्पेस नेविगेशन और लाइफ सपोर्ट सिस्टम जैसी जटिल तकनीकों में मदद मिल सकती है। आगामी वर्षों में, हम चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारतीय और अमेरिकी उपकरणों को एक साथ काम करते हुए देख सकते हैं, जो मानव इतिहास के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
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