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ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख: वैश्विक सुरक्षा और भारत-ऑस्ट्रेलिया पर इसके प्रभाव
ICN24 Newsroom 29 जुल॰ 2026, 09:35 am
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए इसे वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बताया है, जिसका सीधा असर भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर पड़ सकता है।
वॉशिंगटन और कैनबरा के बीच बढ़ते कूटनीतिक विमर्श के बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शासन के प्रति एक बार फिर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि ईरान के शासकों को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उनका तर्क है कि ईरान का वर्तमान नेतृत्व, जो खुद को इस्लामी क्रांतिकारी मानता है, इन हथियारों का इस्तेमाल दुनिया भर में अस्थिरता पैदा करने के लिए कर सकता है। पिछले 47 वर्षों के इतिहास का हवाला देते हुए, ट्रंप ने ईरान को आतंकवाद का प्रमुख प्रायोजक बताया है।
भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के लिए, ईरान की स्थिति केवल एक भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक सुरक्षा से भी जुड़ा है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि मध्य पूर्व में किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल कीमतों और समुद्री व्यापार मार्गों को प्रभावित करता है। भारत के लिए ईरान का चाबहार बंदरगाह रणनीतिक महत्व रखता है, जबकि ऑस्ट्रेलिया अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। ट्रंप की नीति का मुख्य उद्देश्य ईरान की आर्थिक शक्ति को सीमित करना और उसे कड़े प्रतिबंधों के माध्यम से बातचीत की मेज पर लाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दृष्टिकोण 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की रणनीति का हिस्सा है। उनका तर्क है कि यदि ईरान परमाणु शक्ति बन जाता है, तो इससे क्षेत्र में हथियारों की होड़ शुरू हो जाएगी, जिससे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान समर्थित समूहों की सक्रियता ने पहले ही लाल सागर और अन्य व्यापारिक मार्गों में व्यापार को बाधित किया है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासी, जिनका व्यापार और परिवार दोनों क्षेत्रों से जुड़े हैं, इस स्थिति पर करीब से नजर रख रहे हैं।
अंततः, ट्रंप की रणनीति ईरान के भीतर लोकतांत्रिक बदलाव को प्रोत्साहित करने और उसके अंतरराष्ट्रीय वित्त पोषण को रोकने पर आधारित है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि अत्यधिक दबाव से टकराव का खतरा बढ़ सकता है। भारत और ऑस्ट्रेलिया को इस बदलते परिदृश्य में अपनी विदेश नीति को संतुलित करना होगा। जहाँ भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और कनेक्टिविटी के लिए ईरान के साथ संबंध बनाए रखना चाहता है, वहीं ऑस्ट्रेलिया मानवाधिकारों और परमाणु अप्रसार पर अंतरराष्ट्रीय नियमों का कड़ाई से पालन करने का पक्षधर है। आने वाले महीनों में ट्रंप की इन नीतियों का क्रियान्वयन वैश्विक कूटनीति की दिशा तय करेगा।
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