राजनीति
ईरान और होर्मुज जलडमरूमध्य पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: शांति समझौते की जताई उम्मीद
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 05:01 pm

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक नए शांति समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता को लेकर सकारात्मक रुख अपनाया है।
वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक ऐतिहासिक शांति समझौते की संभावना पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है। रविवार को दिए गए अपने ताजा बयान में ट्रंप ने संकेत दिया कि वे ईरान के साथ मौजूदा गतिरोध को समाप्त करने और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुला रखने के लिए कूटनीतिक समाधान के प्रति आश्वस्त हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में सैन्य हलचल और प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप का यह रुख पिछले कुछ हफ्तों के कड़े बयानों के विपरीत एक नरम कूटनीतिक पहल के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि वे ईरान को एक सफल राष्ट्र के रूप में देखना चाहते हैं, बशर्ते कि वह परमाणु हथियारों की अपनी महत्वाकांक्षाओं को त्याग दे और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को बंद करे।
होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत संवेदनशील है। दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी संकरे जलमार्ग से होकर गुजरता है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच विवाद बढ़ता है, तो इस मार्ग के बाधित होने का सीधा असर वैश्विक ईंधन कीमतों पर पड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह खबर महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर परिवहन लागत और दैनिक जीवन की महंगाई को प्रभावित करती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह 'भरोसा' ईरान पर दबाव बनाने की एक रणनीति भी हो सकती है, ताकि उसे वार्ता की मेज पर लाया जा सके। हालांकि, तेहरान की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। ईरान पहले भी कहता रहा है कि वह केवल तभी बातचीत करेगा जब उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटा लिए जाएं।
ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया दोनों ही ऊर्जा सुरक्षा के लिए मध्य पूर्व की स्थिरता पर निर्भर हैं। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में भारतीय मूल के पेशेवर और छोटे व्यवसाय मालिक इस कूटनीतिक हलचल पर करीब से नजर रख रहे हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था के लिए चुनौतियां पैदा कर सकता है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या व्हाइट हाउस की यह सकारात्मक टिप्पणी किसी ठोस समझौते में बदल पाती है या यह केवल कूटनीतिक पैंतरेबाजी का हिस्सा बनी रहती है। फिलहाल, ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक बाजारों को थोड़ी राहत जरूर दी है।
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