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H-1B वीजा शुल्क पर अदालती फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन की अपील, भारतीय पेशेवरों की बढ़ी चिंता
ICN24 Newsroom 13 जून 2026, 10:01 am

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीजा आवेदनों पर $100,000 शुल्क को रद्द करने वाले अदालती फैसले को चुनौती दी है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन ने संघीय अदालत के उस हालिया फैसले के खिलाफ औपचारिक रूप से अपील दायर की है, जिसने H-1B वीजा आवेदनों पर लगाए गए विवादास्पद 100,000 डॉलर के शुल्क को अवैध घोषित कर दिया था। इस कानूनी कदम ने एक बार फिर उन हजारों विदेशी पेशेवरों के बीच चिंता पैदा कर दी है, जो अमेरिका में करियर बनाने का सपना देखते हैं। विशेष रूप से भारतीय आईटी विशेषज्ञों के लिए यह खबर काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे इस वीजा श्रेणी के सबसे बड़े लाभार्थी रहे हैं।
संघीय अदालत ने अपने पिछले फैसले में स्पष्ट किया था कि इतना भारी-भरकम शुल्क वास्तव में एक 'टैक्स' की तरह काम कर रहा है। अमेरिकी संविधान के अनुसार, किसी भी नए कर को लागू करने का अधिकार केवल कांग्रेस (संसद) के पास है, न कि कार्यकारी शाखा के पास। अदालत ने पाया था कि प्रशासन ने अपनी शक्तियों का अतिक्रमण करते हुए यह शुल्क थोपा था, जिसका उद्देश्य विदेशी प्रतिभाओं की नियुक्ति को आर्थिक रूप से अव्यवहारिक बनाना था।
इस कानूनी विवाद का असर पहले ही वीजा आवेदन दरों पर दिखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि शुल्क बढ़ाने के प्रस्ताव के बाद से ही कई अमेरिकी कंपनियों ने H-1B प्रायोजन में कटौती करना शुरू कर दिया था। यदि अपील के माध्यम से यह शुल्क फिर से लागू होता है, तो यह न केवल अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों को प्रभावित करेगा, बल्कि उन भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई परिवारों को भी प्रभावित कर सकता है जिनके रिश्तेदार अमेरिका में बसने की योजना बना रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम प्रासंगिक है। अक्सर देखा गया है कि जब अमेरिका अपनी वीजा नीतियों को सख्त करता है, तो कुशल भारतीय पेशेवर ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों का रुख करते हैं। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के टेक सेक्टर और माइग्रेशन पैटर्न पर भी इसका परोक्ष प्रभाव पड़ सकता है। फिलहाल, ट्रंप प्रशासन कई अन्य कानूनी चुनौतियों का भी सामना कर रहा है जो उनकी आव्रजन नीतियों को लक्षित करती हैं।
जैसे-जैसे यह मामला उच्च न्यायालय की ओर बढ़ेगा, वैश्विक टेक जगत की नजरें इस पर टिकी रहेंगी। आव्रजन विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुकदमे का परिणाम यह तय करेगा कि भविष्य में अमेरिकी कंपनियां विदेशी प्रतिभाओं को किस हद तक आकर्षित कर पाएंगी। यदि प्रशासन की अपील सफल होती है, तो यह कुशल प्रवास (Skilled Migration) के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है।
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