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आज का पंचांग 6 जुलाई 2026: आषाढ़ कृष्ण षष्ठी और सप्तमी का संयोग, जानें शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 10:31 am
6 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि दोपहर तक रहेगी, जिसके बाद सप्तमी का आरंभ होगा। जानें आज के नक्षत्र और शुभ योगों का विस्तृत विवरण।
भारतीय वैदिक ज्योतिष में पंचांग का विशेष महत्व है, जो हमें समय की शुद्धता और ग्रहों की स्थिति के आधार पर शुभ-अशुभ कार्यों का निर्णय लेने में मदद करता है। आज यानी 6 जुलाई 2026, सोमवार का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि आज दोपहर 01:47 बजे तक व्याप्त रहेगी। इसके पश्चात सप्तमी तिथि का आगमन होगा, जो अगले दिन तक प्रभावी रहेगी। वर्तमान में सूर्य देव उत्तरायण की स्थिति में हैं और उत्तर गोल में संचरण कर रहे हैं। ऋतु चक्र के अनुसार यह वर्षा ऋतु का समय है, जो कृषि और प्रकृति के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
आज के नक्षत्र विन्यास की बात करें तो सायं 04:07 बजे तक पूर्व भाद्रपद नक्षत्र रहेगा। इसके बाद उत्तर भाद्रपद नक्षत्र का आरंभ होगा। नक्षत्रों का यह परिवर्तन मानवीय स्वभाव और दैनिक गतिविधियों पर गहरा प्रभाव डालता है। पूर्व भाद्रपद को साहस और संकल्प का नक्षत्र माना जाता है, जबकि उत्तर भाद्रपद स्थिरता और परोपकार का प्रतीक है। योगों की गणना में आज दोपहर 03:51 बजे तक 'सौभाग्य' योग रहेगा, जिसके बाद 'शोभन' योग शुरू होगा। सौभाग्य योग को भाग्य वृद्धि और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना गया है, वहीं शोभन योग सौंदर्य और सकारात्मकता का संचार करता है।
चंद्रमा की स्थिति आज विशेष ध्यान देने योग्य है। प्रातः 09:57 बजे तक चंद्रमा कुंभ राशि में रहेंगे, जिसके उपरांत वे मीन राशि में प्रवेश करेंगे। कुंभ से मीन में चंद्रमा का यह गोचर मानसिक शांति और आध्यात्मिकता की ओर झुकाव पैदा कर सकता है। मीन राशि में चंद्रमा का होना संवेदनशीलता और रचनात्मकता को बढ़ावा देता है। ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए, विशेष रूप से सिडनी, मेलबर्न और पर्थ जैसे शहरों में, भारतीय मानक समय (IST) और स्थानीय समय (AEST/AWST) के अंतर को ध्यान में रखना आवश्यक है। पंचांग की गणना करते समय समय के इस अंतर का पालन करना धार्मिक अनुष्ठानों की शुद्धता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
पंचांग में 'राहुकाल' को वह समय माना जाता है जिसमें नए कार्यों की शुरुआत वर्जित होती है। आज राहुकाल का समय विभिन्न क्षेत्रों के सूर्यास्त और सूर्योदय के आधार पर निर्धारित होगा। सामान्यतः सोमवार को राहुकाल सुबह के समय होता है। किसी भी नए निवेश या यात्रा की योजना बनाने से पहले स्थानीय पंचांग के अनुसार राहुकाल की जांच अवश्य कर लें। इसके विपरीत, 'अभिजीत मुहूर्त' को दिन का सबसे शुभ समय माना जाता है, जिसमें किए गए कार्य सफल होते हैं।
अंततः, आज का दिन आषाढ़ मास की शीतलता और वर्षा ऋतु के आगमन का संकेत है। मेलबर्न और सिडनी में सर्दी के मौसम के बीच, यहाँ का भारतीय समुदाय घरों में विशेष पूजा और संकीर्तन के माध्यम से अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है। षष्ठी और सप्तमी का यह संधि काल संयम और नियम के साथ बिताने से मानसिक बल की प्राप्ति होती है। अपने दैनिक जीवन में पंचांग के इन सूक्ष्म विवरणों को शामिल करना न केवल सांस्कृतिक गौरव है, बल्कि यह समय प्रबंधन का एक प्राचीन और सटीक विज्ञान भी है।
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