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किम जोंग उन ने पेश किया परमाणु-सक्षम विध्वंसक; उत्तर कोरिया के नए युद्धपोत से क्रूज मिसाइल का सफल परीक्षण
ICN24 Newsroom 6 जुल॰ 2026, 11:31 am

उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने 5,000 टन के नए युद्धपोत 'कांग कोन' से क्रूज मिसाइल परीक्षण का निरीक्षण किया, जो देश की नौसैनिक परमाणु क्षमता में बड़ी वृद्धि है।
उत्तर कोरिया ने अपनी सामरिक परमाणु क्षमताओं को समुद्र तक विस्तार देते हुए एक शक्तिशाली परमाणु-सक्षम विध्वंसक (डिस्ट्रॉयर) का अनावरण किया है। देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने स्वयं 'कांग कोन' नामक इस नए मरम्मत किए गए 5,000 टन के बहुउद्देशीय युद्धपोत पर आयोजित व्यापक लाइव-फायर हथियारों के परीक्षण का निरीक्षण किया। सरकारी मीडिया के अनुसार, इस अभ्यास के दौरान एक रणनीतिक क्रूज मिसाइल का सफल प्रक्षेपण किया गया, जिसने अपनी सटीक मारक क्षमता का प्रदर्शन किया।
प्योंगयांग की सरकारी समाचार एजेंसी के मुताबिक, किम जोंग उन ने युद्धपोत की मुख्य नौसैनिक तोपखाने, स्वचालित बंदूकों, रडार ट्रैकिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध सूट के मूल्यांकन की भी समीक्षा की। परीक्षण के परिणामों से संतुष्ट होकर किम ने घोषणा की कि यह पोत अब युद्ध अभियानों के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस विध्वंसक को अगले दो महीनों के भीतर औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल करने का आदेश दिया है। यह कदम उत्तर कोरिया के उस लक्ष्य का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपनी परमाणु मारक क्षमता को केवल भूमि आधारित मिसाइलों तक सीमित न रखकर नौसैनिक बेड़े तक पहुंचाना चाहता है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा समीकरणों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया का यह विकास ऑस्ट्रेलिया और भारत जैसे देशों के लिए चिंता का विषय है। भारत और ऑस्ट्रेलिया, जो क्वाड (QUAD) के प्रमुख सदस्य हैं, लगातार क्षेत्र में 'नेविगेशन की स्वतंत्रता' और स्थिरता की वकालत करते रहे हैं। उत्तर कोरिया द्वारा समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता हासिल करना न केवल दक्षिण कोरिया और जापान के लिए खतरा है, बल्कि यह दक्षिण चीन सागर और आसपास के समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को भी प्रभावित कर सकता है।
ऑस्ट्रेलियाई रणनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि किम जोंग उन का यह कदम सीधे तौर पर क्षेत्र में अमेरिकी प्रभुत्व और उसके सहयोगियों की रक्षा प्रणाली को चुनौती देने के लिए है। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करती है, जिसका सीधा असर व्यापार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर पड़ता है।
आगामी महीनों में 'कांग कोन' के पूर्ण परिचालन में आने के बाद, उत्तर कोरियाई नौसेना की आक्रामक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है, क्योंकि प्योंगयांग द्वारा मिसाइल परीक्षणों में तेजी लाना संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों और वैश्विक शांति प्रयासों के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।
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