राजनीति
कल्याण बनर्जी को टीएमसी नहीं, टीएमसी को ‘कल्याण’ की जरूरत है: रिजू दत्ता का बड़ा बयान
ICN24 Newsroom 14 जून 2026, 04:01 am

टीएमसी से निलंबित नेता रिजू दत्ता ने पार्टी के आंतरिक कलह पर चुप्पी तोड़ते हुए कल्याण बनर्जी का समर्थन किया है और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर जारी अंदरूनी घमासान अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी से निलंबित नेता रिजू दत्ता ने वरिष्ठ सांसद कल्याण बनर्जी के पक्ष में बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। दत्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कल्याण बनर्जी को टीएमसी की जरूरत नहीं है, बल्कि टीएमसी को कल्याण बनर्जी जैसे अनुभवी नेताओं की जरूरत है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पार्टी के भीतर पुराने बनाम नए नेतृत्व की बहस जोर पकड़ रही है।
हाल के दिनों में कल्याण बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के समर्थकों के बीच वैचारिक मतभेद खुलकर सामने आए हैं। रिजू दत्ता ने इन विवादों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पार्टी के भीतर मतभेद होना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन इसे सार्वजनिक रूप से तमाशा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि कल्याण बनर्जी जैसे दिग्गज नेता ने दशकों तक ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया है और उनके अनुभव को दरकिनार करना पार्टी के हित में नहीं होगा।
मदन मित्रा और अन्य नेताओं से जुड़े कानूनी मामलों और विवादों पर बोलते हुए दत्ता ने तटस्थ रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि कानून को अपना काम स्वतंत्र रूप से करने देना चाहिए। जांच एजेंसियों की भूमिका पर सवाल उठाए बिना उन्होंने कहा कि केवल निष्पक्ष जांच ही सच को सामने ला सकती है। उन्होंने आगाह किया कि मीडिया ट्रायल और पार्टी के भीतर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से केवल विपक्ष को फायदा होगा।
भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए भी यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रवासी भारतीय अक्सर पश्चिम बंगाल की स्थिरता और वहां की राजनीतिक संस्कृति पर कड़ी नजर रखते हैं। सिडनी और मेलबर्न में सक्रिय बंगाली प्रवासी समुदायों के बीच अक्सर 'दीदी' बनाम 'अभिषेक' के नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। रिजू दत्ता का यह बयान संकेत देता है कि टीएमसी के भीतर फिलहाल सब कुछ ठीक नहीं है और आने वाले समय में संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
निष्कर्ष के तौर पर रिजू दत्ता ने स्पष्ट किया कि पार्टी को एकजुट रहने की आवश्यकता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भले ही वह वर्तमान में निलंबित हैं, लेकिन उनकी निष्ठा पार्टी के उन मूल मूल्यों के प्रति है जिस पर टीएमसी की नींव रखी गई थी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पार्टी आलाकमान रिजू दत्ता के इस खुले समर्थन और बयानों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।
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