राजनीति
ममता बनर्जी को बड़ा झटका: दिग्गज नेता सुदीप बंदोपाध्याय बागी खेमे में शामिल, संसदीय दल पर दावे की तैयारी
ICN24 Newsroom 15 जून 2026, 08:01 pm

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुदीप बंदोपाध्याय और शताब्दी रॉय ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है, जिससे बंगाल की राजनीति में हलचल मच गई है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) में अंदरूनी कलह अब एक बड़े राजनीतिक संकट में तब्दील होती दिख रही है। पार्टी के सबसे वरिष्ठ चेहरों में से एक और लोकसभा में टीएमसी के नेता सुदीप बंदोपाध्याय ने अब खुले तौर पर बागी रुख अपना लिया है। हालिया घटनाक्रम में बंदोपाध्याय ने अपनी सहयोगी और सांसद शताब्दी रॉय के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि बागी गुट अब आधिकारिक तौर पर 'असली' तृणमूल संसदीय दल होने का दावा पेश करने की तैयारी में है।
सूत्रों के अनुसार, यह बैठक बंद दरवाजों के पीछे हुई और इसके राजनीतिक मायने काफी गंभीर हैं। माना जा रहा है कि सुदीप बंदोपाध्याय और उनके समर्थक जल्द ही लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से मुलाकात कर सकते हैं। वे सदन के भीतर एक अलग गुट के रूप में मान्यता मांग सकते हैं या पार्टी के आधिकारिक नेतृत्व को चुनौती दे सकते हैं। यदि यह गुट पर्याप्त सांसदों का समर्थन जुटाने में सफल रहता है, तो ममता बनर्जी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पार्टी की पकड़ बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा।
यह विद्रोह ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के दबाव का सामना कर रही है। सुदीप बंदोपाध्याय जैसे दिग्गज नेता का जाना पार्टी के लिए केवल एक संख्यात्मक नुकसान नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका भी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और अभिषेक बनर्जी के बढ़ते प्रभाव को लेकर पुराने नेताओं में काफी समय से असंतोष पनप रहा था।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय, विशेषकर बंगाली प्रवासियों के लिए यह खबर चिंता का विषय बनी हुई है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में सक्रिय बंगाली संगठनों के बीच इस राजनीतिक अस्थिरता को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रवासी भारतीय अक्सर अपने गृह राज्य की राजनीति में गहरी रुचि रखते हैं, क्योंकि इसका सीधा असर राज्य के विकास और निवेश की संभावनाओं पर पड़ता है।
फिलहाल, ममता बनर्जी की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर डैमेज कंट्रोल की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। आने वाले कुछ दिन पश्चिम बंगाल और देश की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं, क्योंकि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या सुदीप बंदोपाध्याय का यह कदम दलबदल कानून की जद में आता है या वे पार्टी पर अपना आधिपत्य साबित कर पाते हैं।
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