राजनीति
तृणमूल कांग्रेस में बड़ी बगावत: 19 सांसदों ने मांगी अलग बैठने की जगह, पार्टी में फूट के संकेत
ICN24 Newsroom 12 जून 2026, 08:01 pm

तृणमूल कांग्रेस के 19 सांसदों ने लोकसभा में अलग सीटों की मांग की है, जिससे पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी में बड़े विभाजन की संभावनाएं तेज हो गई हैं।
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे गहरे राजनीतिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर असंतोष उस समय खुलकर सामने आ गया जब वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत 19 लोकसभा सांसदों ने सदन में अपने लिए अलग बैठने की व्यवस्था की मांग की। यह कदम पार्टी नेतृत्व के खिलाफ एक बड़ी बगावत के रूप में देखा जा रहा है और इससे पार्टी के दोफाड़ होने की संभावना प्रबल हो गई है।
संसदीय सूत्रों के अनुसार, इन बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि उन्हें आधिकारिक टीएमसी ब्लॉक से अलग सीटें आवंटित की जाएं। यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब हालिया चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा और इसके तुरंत बाद राज्यसभा के कई सांसदों ने भी अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। सांसदों का यह समूह कथित तौर पर पार्टी की कार्यशैली और निर्णय लेने की प्रक्रिया से नाखुश है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विद्रोह केवल सीटों के आवंटन तक सीमित नहीं है। यह टीएमसी के भीतर एक बड़े संगठनात्मक ढांचे के ढहने का संकेत हो सकता है। चर्चाएं यह भी हैं कि यह गुट किसी अन्य राष्ट्रीय दल में विलय कर सकता है या एक नया स्वतंत्र समूह बना सकता है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी के लिए यह स्थिति न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि पश्चिम बंगाल की आंतरिक राजनीति के लिए भी एक बड़ी चुनौती है।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए भारत की राजनीतिक स्थिरता हमेशा से एक महत्वपूर्ण विषय रही है। विशेष रूप से सिडनी और मेलबर्न में रहने वाले प्रवासी बंगाली समुदाय के बीच इस खबर को लेकर काफी चिंता देखी जा रही है। ऑस्ट्रेलिया-भारत रणनीतिक संबंधों के बीच, भारत के एक प्रमुख राज्य में राजनीतिक अस्थिरता का असर प्रवासी निवेश और सामुदायिक चर्चाओं पर भी पड़ता है।
फिलहाल, टीएमसी नेतृत्व की ओर से इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि, पार्टी के करीबी सूत्रों का कहना है कि डैमेज कंट्रोल की कोशिशें जारी हैं। यदि इन 19 सांसदों की मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो संसद में टीएमसी की ताकत काफी कम हो जाएगी, जिससे केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता पर भी असर पड़ सकता है। आगामी कुछ दिन टीएमसी के भविष्य और पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए निर्णायक साबित होंगे।
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