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द्वितीय विश्व युद्ध: ऑस्ट्रेलियाई नर्सों के नृशंस नरसंहार के पीछे छिपे सच को उजागर करने की मांग

ICN24 Newsroom 20 जून 2026, 10:55 pm
द्वितीय विश्व युद्ध: ऑस्ट्रेलियाई नर्सों के नृशंस नरसंहार के पीछे छिपे सच को उजागर करने की मांग

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान इंडोनेशियाई तट पर जापानी सैनिकों द्वारा मार दी गई ऑस्ट्रेलियाई नर्सों के परिजन अब उस खौफनाक सच को दुनिया के सामने लाने की मांग कर रहे हैं।

द्वितीय विश्व युद्ध के इतिहास में कुछ ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जो आज भी रूह कंपा देती हैं। ऐसी ही एक दुखद घटना थी 1942 का 'बैंका द्वीप नरसंहार', जिसमें जापानी सैनिकों ने ऑस्ट्रेलियाई सेना की 21 नर्सों की निर्मम हत्या कर दी थी। दशकों बाद, इन शहीद नर्सों के वंशज और इतिहासकार अब इस त्रासदी के पीछे के उस सच को पूरी तरह उजागर करने की मांग कर रहे हैं, जिसे लंबे समय तक आधिकारिक फाइलों में दबाया गया या सीमित रखा गया। फरवरी 1942 में, जब सिंगापुर का पतन हुआ, तो एसएस वायनेर ब्रुक (SS Vyner Brooke) नामक जहाज नर्सों और घायल सैनिकों को लेकर सुरक्षित स्थान की ओर जा रहा था। इंडोनेशिया के पास जापानी विमानों ने इस जहाज पर बमबारी कर इसे डुबो दिया। जो लोग तैरकर बैंका द्वीप के तट पर पहुंचे, उन्हें लगा कि वे सुरक्षित हैं, लेकिन वहां उनका सामना मौत से हुआ। जापानी सैनिकों ने पुरुषों को अलग कर दिया और फिर नर्सों को समुद्र की लहरों की ओर पीठ करके खड़े होने का आदेश दिया। इसके बाद उन पर पीछे से गोलियां बरसाई गईं। विवियन बुलविंकेल इस नरसंहार की एकमात्र उत्तरजीवी (survivor) थीं, जिन्होंने मरने का नाटक कर अपनी जान बचाई थी। आज, इस घटना के दशकों बाद, पीड़ितों के परिजन यह मांग कर रहे हैं कि केवल हत्या की बात ही नहीं, बल्कि उन नर्सों के साथ हुए यौन उत्पीड़न के दावों की भी निष्पक्ष जांच हो और उसे इतिहास में सही जगह दी जाए। शोधकर्ताओं का मानना है कि उस समय की सरकार और सैन्य अधिकारियों ने नर्सों के सम्मान की रक्षा के नाम पर उनके साथ हुई यौन हिंसा के तथ्यों को छिपा दिया था। अब उनके परिवार चाहते हैं कि इतिहास के पन्नों में आधा-अधूरा सच नहीं, बल्कि पूरी हकीकत दर्ज हो ताकि आने वाली पीढ़ियां उनके बलिदान की गहराई को समझ सकें। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के लिए यह इतिहास विशेष महत्व रखता है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, ब्रिटिश भारतीय सेना (British Indian Army) के हजारों जवान मलाया अभियान और सिंगापुर की रक्षा में ऑस्ट्रेलियाई सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़े थे। कई भारतीय युद्धबंदियों (POWs) ने भी उसी दौरान जापानी सेना की क्रूरता झेली थी। सिंगापुर के पतन और उसके बाद हुई हिंसा की ये साझा यादें दोनों देशों के सैन्य इतिहास को जोड़ती हैं। इतिहासकार लिंडसे मुर्डोक और अन्य शोधकर्ताओं का कहना है कि सच को स्वीकार करना ही उन महिलाओं के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। ऑस्ट्रेलिया में अब इस बात पर ज़ोर दिया जा रहा है कि युद्ध के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों को केवल 'युद्ध की त्रासदी' कहकर कमतर न आंका जाए। यह न्याय की मांग उन सभी परिवारों के लिए एक सांत्वना है जिन्होंने अपने प्रियजनों को इस अमानवीय कृत्य में खो दिया था।
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