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अरुणाचल में तनाव: APIYO ने ठुकराया उच्च-स्तरीय समिति का प्रस्ताव, अवैध निर्माण गिराने की मांग पर अड़ा
ICN24 Newsroom 11 जून 2026, 07:31 am
अरुणाचल प्रदेश इंडिजिनस यूथ ऑर्गनाइजेशन (APIYO) ने राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति को खारिज करते हुए ईटानगर में अवैध निर्माणों को तुरंत हटाने की मांग की है।
अरुणाचल प्रदेश में स्थानीय स्वदेशी अधिकारों और कथित अवैध निर्माणों को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अरुणाचल प्रदेश इंडिजिनस यूथ ऑर्गनाइजेशन (APIYO) ने राज्य सरकार के उस प्रस्ताव को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है, जिसमें अवैध निर्माण और आव्रजन (immigration) से संबंधित चिंताओं के समाधान के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति (HPC) के गठन की बात कही गई थी। संगठन ने ईटानगर राजधानी क्षेत्र (ICR) में कथित तौर पर अनधिकृत मस्जिद संरचनाओं सहित सभी अवैध निर्माणों को तत्काल गिराने की अपनी मांग दोहराई है।
बुधवार को ईटानगर में पत्रकारों से बात करते हुए, APIYO के प्रतिनिधियों ने कहा कि वे अब समितियों के आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं। उनका तर्क है कि सरकार को जांच समितियों के पीछे छिपने के बजाय मौजूदा कानूनों को लागू करना चाहिए और जमीन पर कार्रवाई दिखानी चाहिए। संगठन का आरोप है कि राजधानी क्षेत्र में बिना उचित अनुमति के कई ढांचे खड़े किए गए हैं, जो क्षेत्र की जनसांख्यिकी और सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
यह मामला केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में चल रहे 'बाहरी बनाम स्थानीय' के व्यापक विमर्श का हिस्सा है। APIYO का कहना है कि अवैध आव्रजन और अनधिकृत धार्मिक या व्यावसायिक निर्माणों के कारण स्थानीय जनजातीय समुदायों के अधिकारों का हनन हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया और विध्वंस की कार्रवाई शुरू नहीं की, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पूर्वोत्तर भारत से ताल्लुक रखने वाले प्रवासियों के लिए, यह खबर चिंता का विषय बनी हुई है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में बसे अरुणाचली समुदाय के लोग अक्सर अपनी सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर चर्चा करते हैं। भारत के सुदूर क्षेत्रों में होने वाली ऐसी हलचलें न केवल वहां के सामाजिक ताने-बाने को प्रभावित करती हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रह रहे भारतीय प्रवासियों के बीच भी चर्चा का केंद्र बनती हैं, जो अपने गृह राज्य की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को लेकर संवेदनशील हैं।
फिलहाल, पेमा खांडू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने शांति की अपील की है और कानून के दायरे में रहकर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारी समूहों का मानना है कि 'अवैध कब्जा' एक गंभीर मुद्दा है जिसे प्रशासनिक देरी से हल नहीं किया जा सकता। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार प्रदर्शनकारियों के अल्टीमेटम पर क्या रुख अपनाती है और क्या बातचीत के माध्यम से किसी बीच के रास्ते पर सहमति बन पाती है।
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