राजनीति
तमिलनाडु: के. अन्नामलाई का भाजपा से इस्तीफा स्वीकार, नई राजनीतिक पारी की शुरुआत की संभावना
ICN24 Newsroom 5 जून 2026, 09:00 pm

तमिलनाडु भाजपा के कद्दावर नेता के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। केंद्रीय नेतृत्व के साथ वैचारिक मतभेदों के बाद उनके अब नई क्षेत्रीय पार्टी बनाने की चर्चा तेज है।
तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर करते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने अपने पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने उनके इस्तीफे को स्वीकार कर लिया है। पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई के इस कदम ने दक्षिण भारत की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सूत्रों के मुताबिक, अन्नामलाई और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच गठबंधन की रणनीति और राज्य में पार्टी के विस्तार के तरीकों को लेकर पिछले कुछ समय से गंभीर मतभेद चल रहे थे।
अन्नामलाई को तमिलनाडु में भाजपा का चेहरा माना जाता था और उन्होंने आक्रामक राजनीति के जरिए द्रमुक (DMK) और अन्नाद्रमुक (AIADMK) जैसे क्षेत्रीय दलों को कड़ी चुनौती दी थी। हालांकि, हालिया चुनावों में गठबंधन की विफलता और स्थानीय नेतृत्व के साथ तालमेल की कमी उनके इस्तीफे का मुख्य कारण बताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि अन्नामलाई अब अपनी खुद की राजनीतिक पार्टी लॉन्च कर सकते हैं, जो विशुद्ध रूप से तमिलनाडु के हितों और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के एजेंडे पर आधारित होगी।
ऑस्ट्रेलिया में बसे भारतीय समुदाय, विशेष रूप से तमिल प्रवासियों के लिए यह खबर काफी मायने रखती है। सिडनी और मेलबर्न जैसे शहरों में रहने वाले तमिल समुदाय के लोग अन्नामलाई की 'एन मन्न, एन मक्कल' (मेरी मिट्टी, मेरे लोग) पदयात्रा के दौरान उनसे गहराई से जुड़े थे। भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई प्रवासियों के बीच उनकी एक 'युवा और शिक्षित नेता' की छवि रही है। उनके इस फैसले से विदेशों में रहने वाले उनके समर्थकों में भी हलचल है, क्योंकि वे उन्हें तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़े विकल्प के रूप में देखते थे।
भाजपा के लिए तमिलनाडु में अन्नामलाई का जाना एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने जमीनी स्तर पर कैडर को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। अब पार्टी के सामने चुनौती यह होगी कि वह राज्य में एक ऐसा नेतृत्व तलाशे जो अन्नामलाई की तरह ही लोकप्रिय और मुखर हो। वहीं, अन्नामलाई के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि उनके नई पार्टी बनाने से राज्य का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
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