राजनीति
बंगाल विधानसभा का आधुनिकीकरण और इसे जन-हितैषी बनाना समय की मांग: शुभेंदु अधिकारी
ICN24 Newsroom 3 जुल॰ 2026, 07:31 pm

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने सदन की कार्यप्रणाली में सुधार और बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर जोर दिया है।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के विधायी ढांचे में बड़े बदलाव की वकालत की है। उनका मानना है कि विधानसभा को न केवल आधुनिक तकनीक से लैस करने की जरूरत है, बल्कि इसे आम जनता के लिए अधिक सुलभ और 'जन-हितैषी' भी बनाया जाना चाहिए। कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए, अधिकारी ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र के इस मंदिर को बदलते समय के साथ अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करना होगा ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
शुभेंदु अधिकारी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश भर की कई विधानसभाएं 'ई-विधान' और डिजिटल सत्रों की ओर बढ़ रही हैं। उन्होंने तर्क दिया कि बंगाल विधानसभा की ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करते हुए, इसके संचालन में आधुनिक उपकरणों का समावेश अनिवार्य है। उनके अनुसार, विधानसभा की कार्यवाही और चर्चाओं तक जनता की पहुंच आसान होनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि तकनीकी नवाचारों के माध्यम से नागरिकों को अपने प्रतिनिधियों के कार्यों को अधिक बारीकी से देखने का अवसर मिलना चाहिए, जिससे संसदीय लोकतंत्र में जनता का विश्वास और मजबूत होगा।
आधुनिकीकरण के इस आह्वान का एक मुख्य पहलू सदन के भीतर होने वाली बहसों की गुणवत्ता और विपक्षी सदस्यों को मिलने वाले अवसर भी हैं। अधिकारी ने अक्सर शिकायत की है कि विपक्ष की आवाज को सदन में पर्याप्त स्थान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि एक 'जन-हितैषी' विधानसभा वह होती है जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों को राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा करने का उचित मंच मिले। बुनियादी ढांचे के स्तर पर, उन्होंने पुस्तकालय के डिजिटलीकरण और विधायकों के लिए शोध सहायता सुविधाओं को बढ़ाने की मांग की ताकि वे अधिक तथ्यों के साथ सदन में अपनी बात रख सकें।
ऑस्ट्रेलिया में रह रहे प्रवासी भारतीय समुदाय, विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से ताल्लुक रखने वाले लोगों के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है। मेलबर्न और सिडनी जैसे शहरों में बसे बंगाली समुदाय अक्सर अपने गृह राज्य की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और शासन व्यवस्था में गहरी रुचि रखते हैं। ऑस्ट्रेलिया की अपनी संसदीय प्रणाली अत्यधिक पारदर्शी और डिजिटल रूप से उन्नत मानी जाती है, जहां नागरिकों की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में, बंगाल विधानसभा में सुधार की यह मांग उन प्रवासियों के बीच भी चर्चा का विषय है जो भारत में बेहतर प्रशासनिक और विधायी मानकों की उम्मीद करते हैं।
हालांकि, राजनीतिक गलियारों में इस मांग को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रहे खींचतान के नजरिए से भी देखा जा रहा है। जहां भाजपा नेतृत्व वाली विपक्ष इसे पारदर्शिता की दिशा में एक कदम बता रहा है, वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का रुख इस पर अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। अंततः, विधानसभा का आधुनिकीकरण केवल कंप्यूटर लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी संस्कृति विकसित करने के बारे में है जहां लोकतंत्र के स्तंभ आम आदमी की जरूरतों के प्रति अधिक संवेदनशील और उत्तरदायी हों।
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